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पीजीआई प्रशासन पर मां के आरोप : नोनी बोली-हमारी बेटी के लिए मना कर बाद में आए दूसरे बच्चे को दे दिया वेंटिलेटर, इसीलिए गई मेरी लाडली की जान

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01सीटीके04...पीजीआई के आपातकालीन विभाग के सामने विलाप करते मृतक बच्ची की मां नोनी व पिता पवन। स
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रोहतक। पीजीआई में वेंटिलेटर नहीं मिलने के कारण मेरी बेटी चली गई। हमारी सुनवाई हो जाती तो बेटी बच जाती। हमारे बाद आए बच्चे को वेंटिलेटर दे दिया गया। पूछने पर जवाब मिला, उसके लिए फोन आया था। सरकारी संस्थान में गरीबों को इलाज नहीं मिलेगा तो वे कहां जाएंगे। गरीब की किसी ने नहीं सुनी। यहां भी पैसे वालों की सुनवाई होती है।
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पीजीआई प्रशासन पर ये आरोप सोनीपत के रायुपर निवासी नोनी व उसके पति पवन ने लगाए हैं। वे रविवार को अपनी बेटी प्रियंसिता के पोस्टमार्टम के बाद शव लेने के लिए शवगृह में पहुंचे थे। बच्ची की माैत के 17 घंटे बीतने के बाद भी प्रियंसिता की मां नोनी के आंसू नहीं थमे थे। अमर उजाला से हुई बातचीत में दंपती ने अपनी बेटी की मौत के लिए पीजीआई प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
दंपती ने कहा कि वेंटिलेटर मिल जाता तो मेरी प्रियंसिता मेरे पास होती। बार-बार कहती रही, मेरी बच्ची को बचा लो। हमारे साथ जो हुआ, वह अब दूसरों के साथ न हो। पीजीआई की बीमार व्यवस्था के चलते हमारी बेटी हमारे साथ नहीं है। हम इंसाफ चाहते हैं ताकि हमारे जैसे दूसरे गरीब मां-बाप के साथ ऐसा न हो।
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मूलरूप से मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के गांव ओटापुर्वा व हाल सोनीपत के गांव रायपुर निवासी पवन व उसकी पत्नी नोनी ने बताया कि शनिवार को नहाते समय बच्ची टब में गिर गई थी। उसका सिर टब में व बाकी शरीर टब के बाहर था। सोनीपत के नागरिक अस्पताल से चिकित्सकों ने पीजीआई रेफर कर दिया। आरोप है कि शनिवार दोपहर करीब दो बजे पीजीआई पहुंची बच्ची को रात 10 बजे तक भी वेंटिलेटर नहीं मिला, जबकि उसे वेंटिलेटर की सख्त जरूरत थी। इस बारे में चिकित्सकों से आग्रह भी किया गया। इसके बावजूद राहत नहीं मिली।


घर में कल से नहीं जला है चूल्हा

प्रियंसिता के साथ हुए हादसे के बाद से उनके घर में चूल्हा नहीं जला है। नोनी ने अपनी बेटी की याद में शनिवार दोपहर से कुछ नहीं खाया। रविवार को दिन भर बेटी के शव के लिए शव गृह में इंतजार करते रहे। पवन ने कहा कि नोनी की हालत ज्यादा खराब है। गर्मी में उसकी तबीयत न बिगड़ जाए, इसलिए पानी भी उसे जबरन पिलाया है।



घटना ने उठाए पीजीआई की व्यवस्था पर सवाल

वेंटिलेटर के इंतजार में बच्ची की मौत ने पीजीआई की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल वेंटिलेटर की उपलब्धता है। संस्थान में अक्सर वेंटिलेटर के लिए हंगामा होता है। आए दिन मरीजों को रेफर करना या लाना पड़ता है। प्रियंसिता को वेंटिलेटर क्यों नहीं दिया गया? चिकित्सक की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो रही है? एक गरीब परिवार को इतनी पीड़ा क्यों सहनी पड़ी?
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