जब विदेशी आक्रमणकारियों ने सनातन संस्कृति को नष्ट भ्रष्ट करने की कोशिश की है तब संतों ने अखाड़ों के माध्यम से रक्षा की है। उन्होंने बनावटी संतों से आगाह करते हुए कहा कि बाईपास संतों से दूर रहें, जो चमत्कार का प्रलोभन देकर भोले-भाले लोगों को ठगते हैं। भारत एक राष्ट्र ही नहीं वरन पूरे संसार का गुरु है, जो पूरे विश्व को आदिकाल से मार्ग प्रशस्त कर रहा है। यह बात श्री महानिर्वाणी अखाड़ा परिषद् के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद ने कही। वे रविवार को गांधी नगर के मातूराम कम्युनिटी सेंटर में हुए महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद के अभिनंदन समारोह और संत सम्मेलन में बोल रहे थे। इसमें 10 महामंडलेश्वर सहित दूर-दराज से अनेक संत शामिल हुए।
आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद ने अन्य महामंडलेश्वरों के साथ मिलकर महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद को छड़ी प्रदान की। इस दौरान आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद ने कहा कि उज्जैन सिंहस्थ कुंभ महापर्व में श्री महानिर्वाणी पंचायती अखाड़ा ने स्वामी विश्वेश्वरानंद को श्री 1008 महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया है। ये रोहतक वासियों का सौभाग्य है कि उन्हें ऐसे संत का सानिध्य मिला है, जो विद्वान हैं, सरल व निर्र्मल हैं। महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद ने कहा कि संतों का प्रमुख कार्य समाज को दिशा दिखाना है। सनातन धर्म की रक्षा के लिए आदि शंकराचार्य ने अखाड़ों की स्थापना की थी। कार्यक्रम स्वामी अमृतानंद सेवा समिति और जय जंडी मां सेवा समिति की ओर से किया गया। आयोजक मंडल ने संतों को शॉल भेंटकर अभिनंदन किया। संचालन महामंडलेश्वर स्वामी देवेंदानंद गिरि ने किया।
सोने के बर्तनों में संतों ने लिया भोजन
आचार्य सहित सभी महामंडलेश्वर और महंतों को सोने के बर्तनों और चांदी की चौकियों में 17 प्रकार के व्यंजन परोसे गए। संतों के विधि-विधान से पूजन के बाद आमजन ने प्रसाद ग्रहण किया।
ये संत भी पहुंचे
वृंदावन से महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद, महाराष्ट्र से महामंडलेश्वर स्वामी त्रिवेंद्रानंद, नई दिल्ली से महामंडलेश्वर स्वामी विद्या गिरि, गौकर्ण धाम रोहतक से महामंडलेश्वर स्वामी कपिल पुरी, कनखल हरिद्वार से महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वर पुरी, वृंदावन से स्वामी जय किशन, महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद, हरिद्वार से गिरधर गिरि, जयपुर से महामंडलेश्वर ज्ञानेश्वर पुरी, साध्वी वीणा माता, स्वामी परम चैतन्य, स्वामी कर्ण पुरी, महंत प्रेम दास, महंत गोपाल दास, महंत सोम प्रकाश और महंत रामदेव ने शिरकत की।
इन संस्थाओं के प्रतिनिधि भी आए
परमार्थ स्वयंसेवी संगठन से जुड़ी सामाजिक संस्थाएं जनसेवा संस्थान, मानव सेवा संघ, हरिओम सेवादल, सति भाई साईंदास सेवा दल, स्नेह बिहारी सेवा समिति, प्राउड टू बी ए ब्लड डोनर अभियान, प्रज्ञा साहित्यिक मंच, श्री शंकराचार्य विश्वदेवायनंद तीर्थ ट्रस्ट, भगवान परशुराम सेवा समिति, यूथ इंडिया एसोसिएशन, माता धनपति चैरिटेबल ट्रस्ट, गौ ग्रास सेवा समिति, भारत विकास परिषद् और लायंस क्लब के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।