महम कांड को लेकर जिला अदालत मेें बुुधवार को सुनवाई हुई। एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में महम पुलिस ने मामले में आरोपी तत्कालीन डीआईजी शमशेर सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करवा दिया। अब मामले में 18 जनवरी को बहस होगी।
आरोपी पक्ष के वकील विनोद अहलावत ने बताया कि भिवानी जिले के गांव खरक जाटान निवासी रामफल ने अदालत में सीआरपीसी की धारा 397 के तहत याचिका दायर की थी। दायर इस्तगासे के मुताबिक याचिकाकर्ता का कहना है कि 27 फरवरी 1990 को महम विधानसभा के उपचुनाव में उसके बड़े भाई हरि सिंह की मौत हो गई थी। इसके लिए इनेलो नेता अभय चौटाला, तत्कालीन डीआईजी शमशेर सिंह अहलावत, करनाल के पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र, भिवानी के डीएसपी रहे सुखदेव राज राणा व गांव दरियापुर के भूपेंद्र उर्फ भूपी, हिसार के गांव दौलतपुर निवासी पप्पू और फतेहाबाद जिले के गांव गिल्ला खेड़ा निवासी अजीत सिंह जिम्मेदार हैं। लंबे समय तक पुलिस सहित कई एजेंसी ने जांच की, लेकिन मामला अनट्रेस मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। इसके चलते रामफल ने महम अदालत में याचिका दायर कर दोबारा से मामले की जांच की मांग की। महम अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। इसके चलते रामफल ने एडीजे कोर्ट में अपील की थी। वकील ने बताया कि मामले में आरोपी तत्कालीन डीआईजी शमशेर सिंह का देहांत हो चुका है। ऐसे में अदालत ने महम पुलिस से उनका मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा था।