दिल्ली बाईपास का दृश्य। अमर उजाला
दिवाली पर इस बार प्रतिबंध के बावजूद खूब आतिशबाजी हुई। पटाखों से निकली हानिकारक गैसों ने वीरवार देर रात ही हवा की गुणवत्ता खराब कर दी। प्रदूषण का स्तर 500 के खतरनाक तक पहुंच गया। इससे दमा, अस्थमा व सांस रोगियों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया। दुपहिया वाहन पर बगैर हेलमेट या चश्मा लगाकर निकले लोगों को आंखों में जलन का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को भी यही स्थिति रही। पीएम 2.5 में एक ही दिन में चार गुणा की वृद्धि हुई है। वीरवार सुबह 9 बजे यह 107 दर्ज किया गया था। जबकि शुक्रवार सुबह 9 बजे यह बढ़कर 400 पहुंच गया। प्रदूषण के इस स्तर में जल्द गिरावट के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। हवा की गुणवत्ता वीरवार शाम से ही बिगड़ना शुरू हो गई थी। शुक्रवार को प्रदूषण अधिकतम 500 के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। सुबह 10 बजे एक्यूआई अधिकतम 500 व औसतन 449 दर्ज किया गया। पीएम 2.5 का स्तर भी 400 रहा। पीएम 2.5 जिले में चार नवंबर की सुबह 107 था। इस दिन प्रदूषण का स्तर औसतन 299 व अधिकतम 450 दर्ज किया गया था। इसमें वीरवार से लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। दिवाली की रात शहर पटाखों के कानफोड़ू धमाकों से गूंजता रहा। कहीं आकाश रंगीन रोशनियों में नहाया नजर आया तो कहीं पटाखा चलने के बाद उठा घना धुआं। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा। इसका असर हमारी हवा की गुणवत्ता पर साफ नजर आया। दिवाली की रात ही प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी होने से हवा दमघोंटू बन गई।
आंखों में होने लगी है जलन
दिवाली पर बढ़े प्रदूषण ने दुपहिया वाहनों पर चलना मुश्किल कर दिया है। हेलमेट या चश्मा लगाए बगैर चलने वालों को आंखों में जलन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हवा के साथ आंखों में धूल कणों के जाने से खुजली, जलन व लाली छाने की शिकायत होने लगी है। ऐसे में चिकित्सक आंखों को सुरक्षित रखने के लिए चश्मा या हेलमेट लगाने की सलाह के साथ दिन में दो से तीन बार आंखों को धोने की सलाह दे रहे हैं। सिविल अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश शर्मा का कहना है कि पटाखों से निकली जहरीली गैसों से हवा प्रदूषित गई है। यह हवा आंखों में लगने से जलन की शिकायत होने लगी है।
सुबह-शाम टहलने से बचें
हवा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे मौसम में सुबह व शाम को टहलना सेहत के लिए हानिकारक है। प्रदूषण सांसों के साथ शरीर में जाकर बीमारी की वजह बनता है। इसलिए ऐसे मौसम में बाहर निकलने से परहेज बरतें। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. इंदु ने कहा कि दिवाली पर प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। यह स्थिति सांस, दमा, सीओपीडी, टीबी व अस्थमा मरीजों के लिए मुश्किल होती है। ऐसे मौसम में लोगों का घर से बाहर निकलने खासकर सुबह व शाम के समय टहलने से परहेज बरतना बेहतर है।
रात के तापमान में आएगी कमी
मौसम विशेषज्ञों की मानें तो अब रात के तापमान में और कमी आएगी। उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने से ठंड बढे़गी। यह ठंड हवा में नमी बढ़ाने का काम करेगी। जबकि धूल कण पहले से ही खतरनाक स्थिति तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में नमी इन धूल कणों के साथ मिलकर स्मॉग बनाएगी। कोहरे की चादर की तरह स्मॉग सड़कों पर आवागमन प्रभावित करेगा।