सोनीपत। खरखौदा थाना प्रभारी रहने के दौरान जसबीर ने करीब साढ़े तीन महीने में ही शराब तस्करी व चोरी का बड़ा गड़बड़झाला कर दिया। जिससे बाद मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियों में आ गया। लॉकडाउन में एक महीने में ही करीब दस हजार पेटी शराब बेच दी गई थी। इसकी जानकारी मिलते ही जसबीर को लाइन हाजिर कर दिया गया था।
तत्कालीन एसपी ने 10 जनवरी को जसबीर को खरखौदा थाने का एसएचओ बनाया था। शराब तस्कर भूपेंद्र ने एसआईटी को बताया था कि लॉकडाउन में शराब के ठेके बंद हो जाने पर गोदाम से शराब चोरी करके बेची थी। अफसरों को 30 अप्रैल को गोदाम से शराब चोरी करके बिक्री किए जाने की जानकारी मिली थी। उसी दिन जसबीर को लाइन हाजिर कर दिया गया था। गिनती में शराब कम मिलने पर 5 मई को इसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। लॉकडाउन 24 मार्च को लगा था। ऐसे में जसबीर खरखौदा में करीब साढ़े तीन महीने ही एसएचओ रहा। शराब गोदाम से तस्करी, चोरी उसने एक महीने में ही करा डाला। जसबीर ने तीन महीने में पहले शराब की तस्करी कराई और उसके बाद गोदाम से शराब चोरी की गई। मामले में करोड़ों का घालमेल हुआ। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दबिश देने गई एसआईटी को भूपेंद्र के फ्लैट पर पड़े हुए 97 लाख रुपये मिले थे।
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एयरफोर्स से सेवानिवृत्ति के बाद पुलिस में भर्ती हुआ जसबीर
गिरफ्तार आरोपी जसबीर सिंह पहले एयरफोर्स में सार्जेंट था। उन्होंने वहां से सेवानिवृत्ति के बाद ही हरियाणा पुलिस में ड्यूटी ज्वाइन की थी। वह रोहतक के भैंसरू खुर्द गांव का रहने वाला है। एयरफोर्स से रिटायरमेंट लेने के बाद वह पुलिस सेवा में आया था। आरोपी ने सितंबर, 2010 में पुलिस विभाग को बतौर एसआई ज्वाइन किया था। 10 जनवरी को उसको खरखौदा थाने का एसएचओ लगाया गया था। शराब मामला सामने आने पर उसको 30 अप्रैल को लाइन हाजिर किया गया था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उसको सस्पेंड कर दिया गया। बाद में 20 मई को उसे बर्खास्त कर दिया गया था।