महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के लॉ डिपार्टमेंट के अधिकारियों की लापरवाही भारी पड़ गई है। विभाग की मान्यता पर उठे सवाल के बाद सोमवार को यूनिवर्सिटी की चार सदस्यीय कमेटी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकारियों से मिली। इस दौरान पता चला कि डिपार्टमेंट ने पिछले चार सालों से बार काउंसिल की सालाना फीस नहीं भरी है। अब बार काउंसिल ने यूनिवर्सिटी पर चार लाख फीस समेत आठ लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है।
कई दिन पूर्व इनसो छात्र संगठन को बार काउंसिल ऑफ इंडिया का एक पत्र मिला था। इस पत्र में बार काउंसिल ने साल 2010-11 के बाद एलएलबी में पंजीकृत छात्रों को वकील बनने के योग्य मानने से इनकार कर रखा था। हालांकि, यह पत्र यूनिवर्सिटी को नहीं मिला था, लेकिन पत्र के वायरल होते ही इनसो छात्र संगठन ने बवाल कर दिया। इसी मामले पर सोमवार को रजिस्ट्रार जितेंद्र भारद्वाज, विभागाध्यक्ष प्रो. बदरूद्दीन, प्रो. एएस दलाल और प्रो. नरेश शर्मा समेत चार
अधिकारियों की कमेटी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकारियों से मिली।
सूत्रों की मानें तो डिपार्टमेंट को हर साल एक लाख रुपये की फीस बार काउंसिल ऑफ इंडिया में भरनी होती है। बताया जा रहा है कि पिछले चार साल से यह फीस नहीं भरी गई, यानी चार साल में यूनिवर्सिटी को चार लाख रुपये जमा कराने थे, लेकिन अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने फीस समेत आठ लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया।
इसके बाद ही साल 2010-11 के बाद पंजीकृत छात्रों को वकील के योग्य माना जाएगा। अब सवाल यह है कि यूनिवर्सिटी फीस जमा करके अपना पीछा छुड़ा लेगी, लेकिन जिन अधिकारियों की वजह से जुर्माना लगा उनके खिलाफ क्या कोई कार्रवाई होगी? सवाल यह भी है कि कानून की पढ़ाई कराने वाला डिपार्टमेंट ही ऐसी लापरवाही करेगा तो बाकी का क्या हाल होगा?
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लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन?
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर लॉ डिपार्टमेंट के अधिकारियों की लापरवाही स्पष्ट तौर पर सामने आ रही है, लेकिन बड़ी बात यह है कि पिछले चार साल से बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी फीस को लेकर कोई नोटिस क्यों नहीं भेजा? जिस पत्र के बाद बवाल मचा है वह पत्र भी अभी तक अधिकारिक तौर पर यूनिवर्सिटी में नहीं आया है।
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इस मामले को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकारियों से मुलाकात हुई है। जो भी फीस बकाया है वह जमा करा दी जाएगी।
- प्रो. बदरूद्दीन, एचओडी लॉ डिपार्टमेंट एमडीयू