शहर के सबसे पुराने किला रोड को जल्द ही जाम की समस्या से निजात मिल सकेगी। शिमला के माल रोड की तर्ज पर न केवल यातायात व पार्किंग फ्री बनाया जाएगा, बल्कि सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सोमवार को कृषि एवं पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने जिला विकास भवन में लोक संपर्क एवं परिवेदना समिति की बैठक में इसके लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। बैठक करीब 12 बजे शुरू हुई। इसमें सबसे पहले विभिन्न विभागों से जुड़ी करीब 12 समस्याएं रखी गई।
इन समस्याओं के बाद कृषि मंत्री ने वहां पर मौजूद अन्य लोगों की भी समस्याएं सुनी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायत पर शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर होना चाहिए। बैठक के दौरान किला रोड के निवासियों ने अपनी समस्याओं को रखा।
उन्होंने बताया कि यहां अक्सर जाम की समस्या रहती है। कई बार अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। इस पर कृषि मंत्री ने विधायक मनीष ग्रोवर से बात की और आश्वासन दिया कि किला रोड को जल्द ही जाम से निजात दिला दी जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पार्किंग व यातायात फ्री बनाने के लिए वहां का मौका मुआयना करें। दिन के समय किसी भी वाहन को बाजार में न आने दिया जाए। इसके साथ ही सौंदर्यकरण का भी प्रयास किया जाए। कृषि मंत्री ने समस्याओं को सुनकर अधिकारियों को शीघ्र ही समाधान के निर्देश दिए।
फर्जी मिली कई शिकायत
डोभ गांव की महिलाओं और छात्राओं के नाम पर गांव में नशे का व्यापार करने की शिकायत की गई थी। पुलिस ने मामले की जांच की और संबंधित व्यक्ति के मकान में दबिश दी। पुलिस ने बताया कि जांच में यह शिकायत फर्जी मिली है। इस पर कृषि मंत्री ने परिवेदना समिति की एक महिला सदस्य समेत दो सदस्यों को दोबारा से जांच के निर्देश दिए।
सीसरखास के सूबेदार बिजेंद्र सिंह के खाते से रुपये निकालने की भी शिकायत आयी थी, लेकिन जांच में सामने आया कि पीड़ित व्यक्ति के खाते से उसके बेटे व भांजे ने ही रुपये निकाले हैं, जिस पर शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली।
बैठक में रखी गई समस्याओं का हुआ समाधान
यूं तो अधिकारियों के कार्यालयों में समस्याओं को लेकर अंबार लगे रहते हैं, लेकिन सोमवार को परिवेदना समिति की बैठक में अधिकारियों ने दर्शा दिया कि हमारे यहां सब कुछ ठीक है। दरअसल, बैठक में अधिकरियों ने विभिन्न विभागों से जुड़ी केवल 12 समस्याएं ही रखी और समस्याएं भी वह जिनका समाधान हो चुका है।
अब सवाल है कि जब समाधान हो ही चुका है तो फिर बैठक में रखने का क्या औचित्य। इससे तो यही लग रहा था कि अधिकारी इन समस्याओं को कृषि मंत्री के सामने रखकर शायद खुद की पीठ ही थपथपा रहे हो।