कारगिल योद्धा ::
- रोहतक के सैमाण गांव के जसवीर सिवाच 11 माह की देश सेवा, 21 की उम्र में हुए शहीद
अजमेर गोयत
महम (रोहतक)। बेटे के लिए रिश्ता देख रही थी। शादी के लिए तैयारियां चल रही थीं। इससे पहले ही कारगिल की लड़ाई छिड़ गई। 28 जून 1999 को कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों में दुश्मन को खदेड़ते हुए सिपाही जसवीर सिवाच देश के लिए बलिदान हो गए। मां इंद्रावती ने भावुक होते हुए पुराने लम्हे साझा किए।
जसवीर सिवाच उर्फ तेजवीर पहलवान का जन्म 15 जून 1978 को महम खंड के गांव सैमाण में बलबीर सिवाच व इंद्रावती के घर हुआ। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की। शुरू से ही पहलवानी के शौकीन जसवीर को सेना में भर्ती की चसक लगी तो गांव की सड़कों पर दौड़ लगाने का अभ्यास शुरू कर दिया। वह 27 जुलाई 1998 को 20 वर्ष की आयु में ही राजपूताना राइफल्स में सिपाही के पद पर शामिल हो गए। जवान ने महज 11 माह की सेवा में अदम्य साहस का परिचय दिया। 28 जून 1999 को महज 21 साल की उम्र में देश के लिए बलिदान हो गए।
भाई जगविंद्र ने बताया कि हम चार भाइयों में जसवीर सबसे छोटे थे। 28 जून 1999 की दोपहर घर के पास बनी बैठक (बड़े बुजुर्गों के बैठने का स्थान) में पिता के साथ कुछ ग्रामीण ताश खेल रहे थे। इसी दौरान दो सैनिक आए व जसवीर के बलिदान होने की सूचना दी।
सेना के चलाए जा रहे ऑपरेशन विजय के अंतिम चरण में होने की भी सूचना दी। टाइगर हिल में छिपे आतंकियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के दौरान दुश्मन की ओर से हुए हमले में जसवीर बलिदान हो गए। इसके अगले दिन उनका पार्थिव शरीर सेना की गाड़ी व प्रशासनिक अमले के साथ गांव पहुंचा। शहीद की याद में शव के दाह संस्कार की जगह पंचायत ने शहीद स्मारक बनाया। यहां हर साल ग्रामीण शहीद को श्रद्धांजलि देकर उनके बलिदान को याद करते हैं। पिता बलबीर सिवाच का पिछले साल देहांत हो गया। संवाद
फोटो 01 शहीद जसवीर सिवाच
02 शहीद की मां इंद्रावती
महम के गांव सैमान निवासी शहीद जसवीर सिवाच के स्मारक स्थल पर नमन करने पहुंचे उसके परिजन व ग्रामी