रोजगार कार्यालय की ओर से एमडीयू में आयोजित राज्य स्तरीय जॉब फेयर लक्ष्य का 12 प्रतिशत ही प्राप्त कर पाया। यहां 10 हजार बेरोजगारों को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया गया था। इसमें से महज 1234 को ही नौकरी मिली। यही नहीं यूआईईटी भवन में सैकड़ों युवाओं के रिज्यूम व दस्तावेज बिखरे मिले। यहां दोपहर बाद भी साक्षात्कार नहीं होेने पर युवाओं को मायूस घर लौटना पड़ा।
जॉब फेयर में एमडीयू आए युवा मंगलवार विभिन्न विभागों में अपना करियर संवारने में जुटे रहे। साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल होकर खुद को साबित करने में दिन युवा दिन भर जूझते रहे। वहीं युवाओं का एक बड़ा वर्ग यूआईईटी भवन में नाराज नजर आया। भवन की दूसरी मंजिल के कमरा नंबर 322 में युवाओं का हुजूम नजर आया। यहां एक मैटल कंपनी को जगह दी गई थी। इस कमरे में कंपनी की टीम को साक्षात्कार लेना था। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए बेरोजगार युवाओं से उनके रिज्यूम लिए गए। इसके बाद वहां कोई नजर नहीं आया। युवा घंटों इंतजार के बाद कमरे में दाखिल हुए तो उनके रिज्यूम व दस्तावेज फर्श पर बिखरे मिले। यह देखकर युवा गुस्सा हो गए। शिकायत के लिए वे कंपनी के अधिकारियों को तलाशते नजर आए, मगर कोई नहीं मिला। इसके चलते दोपहर बाद वे वापस लौट गए।
मोहित, रिंकू, आशीष, अर्जुन, विक्रम, मोनू, सुनील, विनीत ने बताया कि हम रोजगार के लिए जॉब फेयर में मंगलवार सुबह नौ बजे आए थे। यहां कमरे में अपना रिज्यूम व अन्य दस्तावेज जमा कराए थे। कंपनी के अधिकारियों ने हमें बाहर इंतजार करने को कहा। काफी देर बाद भी हमें नहीं बुलाया गया। इस दौरान कंपनी के सदस्य एक-एक करके वहां से निकल गए। बाद में कमरे में जाकर देखा तो वहां चारों ओर कागज बिखरे पड़े थे।
जॉब फेयर में मिला तीन से पांच लाख का पैकेज
-एमडीयू में लगे फेयर में शामिल कुछ युवाओं को मिला बेहतर करियर अवसर
एमडीयू में लगे राज्य स्तरीय जॉब फेयर कुछ बेरोजगारों के लिए बेहतर करियर अवसर देने वाला साबित हुआ। इन्हें तीन से पांच लाख रुपये सालाना पैकेज मिला है। निजी कंपनियों ने अपनी कसौटी पर खरे उतरे उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया है। शहर की दो बेटियों व एक बेटे ने इस स्वीकार करते हुए करियर की नई राह पर कदम बढ़ा दिया है। अमर उजाला से हुई बातचीत में इन्होंने अपनी खुशी साझा की।
मार्केटिंग हेड का पद व पांच लाख का पैकेज मिला
शहर के किला रोड इलाके में रहने वाली हिमांशी जॉब फेयर में आकर खुश है। इसकी वजह उसे यहां एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में पांच लाख रुपये का पैकेज मिलना है। कंपनी ने उसे मार्केटिंग हेड की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए उसे बहादुरगढ़ जाना होगा। घर से कुछ दूर सही मगर करियर के लिए बेहतर अवसर को एमसीए पास हिमांशी छोड़ना नहीं चाहती है। इसीलिए कंपनी का यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। यही नहीं वह बेहतर भविष्य की तलाश में सरकारी नौकरी के लिए भी प्रयासरत है। हिमांशी का कहना है फिलहाल तीन लाख रुपये सालाना पैकेज पर काम रही हूं। अब जॉब फेयर में दो लाख अधिक का पैकेज लिया है।
फेयर में 4 लाख के पैकेज के साथ मिली नौकरी
शहर के सेक्टर एक में रहने वाली पल्लवी को एक कंपनी ने चार लाख रुपये सालाना का पैकेज दिया है। एमसीए पास इस छात्रा को कंपनी ने बिजनेस डवलपमेंट इग्जिक्यूटिव पद पर नियुक्ति दी है। पल्लवी का कहना है कि जॉब फेयर ने उसकी उम्मीदों को पूरा किया है। वह 18 जुलाई को अपना कार्यभार संभालेगी। इसके अलावा एक अन्य कंपनी ने भी उसे एसिस्टेंट मैनेजर पद के लिए चुना है। यह जिम्मेदारी गुड़गांव के लिए है। जबकि बिजनेस डवलपमेंट एग्जिक्यूटिव की जिम्मेदारी बहादुरगढ़ में दी गई है।
बीटेक कर 3 लाख पैकेज पर मिली पहली जॉब
शहर के अर्जुन नगर निवासी रोहित हुरिया को जॉब फेयर में टेकिभनकल ट्रेनर की नौकरी मिली है। कंपनी ने तीन लाख रुपये सालाना पैकेज दिया है। बीटेक पास रोहित की यह नौकरी है। इसे लेकर वह खासा उत्साहित है। इसका कहना है इस पहली जॉब से करियर का स्टार्टअप हो रहा है। जॉब फेयर में आना फायदेमंद रहा। यहां अपनी उम्मीद के अनुसार काम व दाम दोनों मिले हैं।