24 मई की प्रात: मुझे विवश होकर पानीपत जाना पड़ा क्योंकि वहां बड़ी संख्या में विद्रोहियों ने दो तोपों के साथ हमला बोला था। मैं 28 मई तक पानीपत रहा जब तक सर एच बर्नार्ड ने 60वीं रेजीमेंट के साथ वापस रोहतक जाने के आदेश मुझे दिए। इस रेजीमेंट के सिपाहियों ने भी मेरे हुक्म को मानने से इन्कार कर दिया। रोहतक लौटकर मैंने देखा कि कचहरी, रिकॉर्ड ऑफिस, खजाना, सिविल कोर्ट सब बर्बाद है। दिल्ली का बादशाह हिंदुस्तान का बादशाह घोषित हो चुका है और सदर अमीन को इस जिले का सूबेदार घोषित कर दिया गया है। मैंने सुना है कि अलीपुर और सिरसा खाली कर दिए गए हैं। हम सब यहां बड़े संकट में हैं और हर घड़ी दिल्ली की खबरें सुनने को आतुर हैं। - 6 जून 1857 को उत्तर पश्चमी प्रांत के सेक्रेटरी थार्न हिल को जेडी लाक ने लिखा पत्र - संदर्भ : राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली
आग लगने से विस्फोट हुआ
रोहतक के बागी ब्रिटिश फौजों पर गोलियों से जोरदार हमला कर रहे हैं, लेकिन हमने अपना बचाव किया और कोई खास नुकसान नहीं हुआ। दिनांक 8 अगस्त 1857 को ब्रिगेडियर जनरल निकलसन भारी फौज के साथ पहुंच गए हैं और बागियों पर हमला कर दिया है। शहर में एक बहुत बड़ी बारूद फैक्टरी थी, जिसमें आग लगने से विस्फोट हुआ। इसमें लगभग 500 बागी हताहत हुए। फिर भी बागी बड़े जोरों से मुकाबला कर रहे हैं। इसमें ब्रिटिश सैनिक भी हताहत हुए हैं। महाराजा जींद से संदेश प्राप्त हुआ है कि वह जल्दी ही रोहतक में ब्रिटिश सहायता के लिए सेना भेज रहे हैं। मेजर वाच हाउस एचएम 24वीं पैदल सेना और कैप्टन पटोनस घुड़सवार सेना के साथ आज प्रात: मियामीर पहुंच गए हैं। -12 अगस्त 1857 को चीफ कमिश्नर ऑफिस लाहौर के नाम लेफ्टिनेंट मिलिट्री सेक्रेटरी चीफ कमिश्नर जेडी मैक्फरसन ने लिखा पत्र - संदर्भ : राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली