कम दृष्टि जागरूकता माह विशेष
पीजीआई ओपीडी में रोजाना 700 मरीज पहुंच रहे, बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही चश्में की समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। डिजिटल दौर में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टर स्क्रीन टाइम और अनुवांशिक लक्षणों को इसका प्रमुख कारण मान रहे हैं। इतना ही नहीं पीजीआई की ओपीडी में रोजाना करीब 700 मरीज आंखों के इलाज लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से लगभग 245 मरीज केवल चश्में लगवाने के लिए आते हैं।
पीजीआई के नेत्र विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुमित सचदेवा का कहना है कि इन समस्याओं से बचने के लिए हम सभी को दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना होगा। आने वाले मरीजों में नंबर बढ़वाना, काला व सफेद मोतियाबिंद, कार्निया की समस्या, गर्मी या प्रदूषण से आंखों में रिएक्शन और उम्र के साथ आंखों का कमजोर होना जैसी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं।
शुगर रेटिना पर्दे को कर रहा प्रभावित
डॉ. सुमित सचदेवा ने बताया कि आंखों की मांसपेशियां कमजोर होने पर व्यक्ति किसी एक जगह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है। फिर मांसपेशियों को शांत करने के लिए आंखों को बार-बार रगड़ते रहते हैं जिससे समस्या बढ़ सकती है। वहीं, शुगर की बीमारी का असर आंखों की रेटिना पर्दे पर भी पड़ता है। रेटिना पर्दे की नसों पर दबाव बढ़ने से उनमें से रक्त निकलकर पर्दे पर आ सकता है।
डिजिटल लाइफस्टाइल बन रही चुनौती
डॉ. सुमित सचदेवा ने बताया कि डिजिटल लाइफस्टाइल भी आंखों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने से चश्मे का नंबर बढ़ रहा है। आंखों की नसें कमजोर हो रही हैं। बच्चे बाहर खेलने की बजाय मोबाइल और अन्य स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताते हैं जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी प्रभावित होता है।
इस तरह करें बचाव
आंखों की सेहत के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। विटामिन ए, सी व ई युक्त हरी सब्जियां, गाजर और पपीता आंखों के लिए फायदेमंद हैं। दाल से मिलने वाला प्रोटीन भी जरूरी होता है। इसके अलावा समय-समय पर आंखों की जांच भी करानी चाहिए।