संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। ग्राम नांदल के खड़े वाला जोहड़ के किनारे 8-10 पीपल के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की भी अपील की है।
ग्रामीण जयपाल ने बताया कि ये पीपल के पेड़ वर्षों से जोहड़ के किनारे खड़े थे। ये पेड़ पर्यावरण के साथ-साथ गांव की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक थे। पीपल को देवतुल्य मानकर पूजा जाता है और यह ऑक्सीजन का बड़ा स्रोत है।
वृक्षों के कटने से ग्रामीणों की भावनाएं आहत हुई हैं और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है। आरोप है कि वृक्षों को बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और कानूनी प्रक्रिया के काटा गया है। यह पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पर्यावरण संरक्षण संबंधी निर्देशों का उल्लंघन हो सकता है।
बिजली निगम की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों ने बिजली निगम रोहतक डिवीजन-3 के जेई, एसडीओ, एक्सईएन और एसई की भूमिका की जांच की मांग की है। उन्होंने पूछा है कि कटाई से पहले वन विभाग से एनओसी ली गई थी या नहीं। ग्रामीणों ने मामले की समयबद्ध जांच, अनुमति व अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर प्रतिपूरक पौधरोपण कराने और जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ता को देने की भी बात कही है।