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मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कैसे शिफ्ट हो डेयरियां

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रोहतक। डेयरी कॉम्प्लेक्स में शिफ्टिंग के लिए नगर निगम डेयरी संचालकों के लगातार चालान काट रहा है, फिर भी मकसद फिलहाल पूरा होता नहीं दिख रहा। डेयरी एसोसिएशन के प्रधान एवं सीनियर डिप्टी मेयर का तर्क है कि डेयरी कॉम्प्लेक्स में पेयजल, सीवरेज, बिजली नहीं है और पशुओं के अस्पताल, पुलिस चौकी, दुकान और आवागमन के पक्के रास्ते की भी व्यवस्था नहीं हैं। जब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं होंगी तब तक मैं तो डेयरी को शिफ्ट करने के लिए नहीं कह सकता हूं।
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कच्चा बेरी रोड के आसपास करीब 200 डेयरियां हैं। इनसे निकलने वाला गोबर व गंदगी सीधे अंडरग्राउंड नाले में बहाई जाती है। सैकड़ों पशुओं का गोबर बहाने की वजह से नाला पूरी तरह से जाम हो गया है। कई सफाई कर्मियों के लगाने से भी समस्या का निदान नहीं हो रहा है। इस समस्या का निदान करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने डेयरियों को डेयरी कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए नोटिस थमाए जा चुके हैं, इनमें कहा गया है कि यदि शिफ्टिंग नहीं होगी तो डेयरी कॉम्प्लेक्स में प्लॉट का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही गंदगी फैलाने पर डेयरियों के चालान काटकर जुर्माना वसूलना शुरू कर दिया है। जुर्माना वसूलने के लिए टीमें भी लगा दी है, बावजूद इसके फिलहाल डेयरियों की शिफ्टिंग होती नहीं दिखती। इसकी वजह डेयरी कॉम्प्लेक्स में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होना है। साल 2001 में तत्कालीन सरकार ने कन्हेली रोड पर डेयरी कॉम्प्लेक्स बनाने का फैसला लिया था। 250 डेयरी संचालकों को कॉम्प्लेक्स में भूखंड आवंटित हुए। अभी तक बमुश्किल 80-90 डेयरी ही शिफ्ट हो सकी है।
ये हैं डेयरी कॉम्प्लेक्स में असुविधाएं
- अस्थायी कनेक्शन पर महंगी बिजली मिलना
डेयरी कॉम्प्लेक्स का विद्युतीकरण नहीं होने की वजह से बिजली निगम अस्थायी कनेक्शन दे रहा है। जिसके चलते डेयरी संचालकों को 14 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदनी पड़ रही है।
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- हाईटेंशन लाइन से हादसे का अंदेशा
डेयरी कॉम्प्लेक्स के प्लॉटों के ऊपर से 33केवी की हाइटेंशन लाइन गुजर रही है। जिससे हादसा होने की आशंका के चलते डेयरी संचालक निर्माण भी करवाने से डर रहे हैं। हाइटेंशन लाइन शिफ्ट करने के लिए बिजली निगम 1.70 करोड़ रुपये मांग रहा है। जब तक निगम भुगतान नहीं करेगा तब तक लाइन शिफ्ट नहीं होगी।
- पेयजल व सीवरेज की व्यवस्था नहीं
डेयरी कॉम्प्लेक्स एरिया का भूगर्भ जल खारा है, जिसको पशु भी नहीं पीते हैं। सीवर की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में डेयरी संचालकों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत पशुओं के लिए पानी की है। सीवरेज की भी व्यवस्था नहीं है।
- लाखों के पशुओं की सुरक्षा का इंतजाम नहीं
डेयरी संचालकों का कहना है कि एक-एक पशु लाख रुपये का होता है। डेयरी कॉम्प्लेक्स में यदि पशुओं को बांध देंगे तो वहां सुरक्षा को कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में यदि एक पशु चोरी होता है, तो बड़ा नुकसान होगा। इसके लिए पुलिस चौकी चाहिए।
- पशु अस्पताल और डॉक्टर का इंतजाम हो
डेयरी संचालकों का कहना है कि पशुओं की तबियत भी खराब होती है। ऐसे में डेयरी कॉम्प्लेक्स के आसपास पशु अस्पताल और डॉक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए। तबियत खराब होने पर पशु को अस्पताल लेकर जाना मुश्किल का काम होता है।
- चारे के अलावा लोगों के जरूरी सामान की हो दुकानें
डेयरी कॉम्प्लेक्स के पास में चारे की दुकानों के अलावा लोगों के जरूरी सामान की दुकान भी होनी चाहिए। जब लोग डेयरियों में रहेंगे तो वहां खाना भी बनाकर खाएंगे। ऐसे में जरूरी सामान की दुकानें भी होनी चाहिए।
- गोबर गैस प्लांट लगाना चाहिए
डेयरियों से निकलने वाले गोबर का निस्तारण करने के लिए गोबर गैस प्लांट लगाने की मांग की जा रही है। इस प्लांट के लगने से डेयरियों को काफी लाभ होगा और गोबर का भी निस्तारण होगा।
वर्जन
डेयरियों को डेयरी कॉम्प्लेक्स में शिफ्टिंग का प्रयास किया जा रहा है। इसके चलते ही टीम लगाकर डेयरियों के चालान काटकर जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जा रही है।
- डॉ. नरहरि बांगड़, नगर निगम आयुक्त
डेयरी कॉम्प्लेक्स में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पानी, बिजली, अस्पताल, सुरक्षा व पक्के रास्ते की सुविधा नहीं है। ऐसे हालात में डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए नहीं कह सकता।
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- राजकमल सहगल, सीनियर डिप्टी मेयर एवं डेयरी एसोसिएशन प्रधान
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