पीजीआईएमएस रोहतक में ऑर्गन डोनेशन का दूसरा उदाहरण सामने आया है। रोहतक निवासी करीब 60 वर्षीय ब्रेन डेड महिला के परिजनों ने उनके ऑर्गन्स डोनेट किए हैं। देश सेवा से जुड़े परिवार ने ब्रेन डेड हो चुकी महिला के अंगदान का फैसला लिया और 2 लोगों को जीवनदान के साथ दो लोगों के जीवन में रोशनी देकर पूरे प्रदेश में एक अंगदान की अलख जगाई है। ऐसा परिवार बहुत ही बधाई का पात्र हैं जिन्होंने दो लोगों को नया जीवन दान दिया है।
यह बातें पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना ने कही। उन्होंने अंतिम समय में परिवार को सांत्वना देते हुए कहा की परिवार ने अंगदान कराकर प्रदेश में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि हम जीते जी तो समाज सेवा कर ही सकते हैं जाते-जाते भी हम किसी को नया जीवनदान देकर जा सकते हैं।
निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने रविवार को महिला के अंतिम संस्कार पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महिला के परिवार में पूरे समाज के लिए एक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक होना होगा।
हाल रोहतक में रह रहे रिटायर्ड कर्नल में बताया कि करीब 60 वर्षीय उनकी पत्नी को ब्रेन हेमरेज होने के चलते पीजीआईएमएस के न्यूरो सर्जरी विभाग में डॉ. ईश्वर सिंह की निगरानी में आईसीयू में भर्ती कराई गई, जहां डॉ. तरुण व अन्य चिकित्सकों की टीम ने महिला को बचाने का आवश्यक प्रयास किया।
डॉ. ईश्वर ने इलाज के बाद पाया कि मरीज ब्रेन डेड लग रही है, ऐसे में उन्होंने डेथ सर्टिफिकेट कमेटी को अपना अलर्ट भेजा। इस पर निदेशक डॉ. एसएस लोहचब व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने तुरंत प्रभाव से कमेटी बनाकर मरीज की क्लीनिकल जांच और परीक्षण समेत सभी मेडिकल जांच करने के आदेश दिए जिसमें कमेटी ने पाया कि मरीज ब्रेन डेड हो चुकी है।
मरीज के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद डॉ. ईश्वर व सोटो की टीम ने परिवार को अंगदान के बारे में बताया। इस पर महिला के पति, बेटे व बेटी ने अपनी मां की यादों को जिंदा रखने का फैसला लिया और किडनी, लीवर, फेफड़े व आंखें दान करने की सहमति प्रदान की। इसके बाद तुरंत प्रभाव से हरियाणा व अन्य राज्यों में अलर्ट भेजा गया जहां से अलग-अलग अस्पतालों की टीमें अंग लेने के लिए पीजीआईएमएस रोहतक पहुंची, लेकिन फेफड़े किसी अन्य मरीज के लिए फिट ना होने के चलते केवल लीवर, किडनी व आंखें ही दान की जा सकी।
इस अवसर पर कुलपति डॉक्टर अनीता सक्सेना, निदेशक डॉ. एसएस लोहचब, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल, न्यूरो सर्जरी विभाग अध्यक्ष डॉ. ईश्वर सिंह, डॉ. तरुण, सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह, डीएमएस डॉ. जितेंद्र जाखड़ सहित सोटो की टीम, ट्रांसप्लांट सर्जन व नेफ्रोलॉजिस्ट उपस्थित रहे।
दूसरी बार बना ग्रीन कॉरिडोर
पीजीआइएमएस निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने बताया कि पीजीआईएमएस ने दूसरी बार अंगदान कराया गया है। ऐसे में बेंगलूरु, आईएलबीएस नई दिल्ली से टीमें अंग लेने के लिए पहुंची थी। उन्होंने बताया कि शरीर से अंग निकालने के बाद उसकी कुछ घंटे की मयाद होती है जिसके अंदर अंग को किसी अन्य शरीर में लगाना होता है अन्यथा वह अंग खराब हो जाता है। ऐसे में जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन से संपर्क किया गया तो उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत प्रभाव से रोहतक से दिल्ली तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार करा दिया। डॉ. लोहचब ने बताया कि पीजीआई से दिल्ली तक पहुंचने में कई बार करीब 3 से 4 घंटे लग जाते हैं लेकिन रोहतक पुलिस की मदद से एम्बुलेंस लिवर को लेकर डेढ़ घंटे से भी कम समय में दिल्ली पहुंच गई। चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन मित्तल ने बताया कि दोनों किडनी पीजीआई में चिकित्सकीय कारणों से एक ही मरीज को लगाई गईं।
प्रदेश के लिए मिसाल बन यह परिवार
डॉ. अनिता सक्सेना ने बताया कि इस परिवार ने प्रदेश का दूसरा अंगदान करके पूरे प्रदेश में एक नई मिसाल कायम करते हुए सबके सामने एक उदाहरण पेश किया है कि हम मरने के बाद भी इस दुनिया में अपनों को कैसे जीवित रख सकते हैं।
नेक दिल महिला थी मरीज
न्यूरोसर्जरी विभाग अध्यक्ष डॉ ईश्वर सिंह ने बताया कि महिला हमेशा समाज की भलाई के लिए दूसरों को संदेश देती थी और अब उन्होंने जाते-जाते भी पूरे प्रदेश को अंगदान का संदेश देकर बहुत ही नेक कार्य किया है। महिला के पति रिटायर्ड कर्नल ने बताया कि महिला रोहतक में रहती थी जिसके चलते जब भी उनके गांव से कोई व्यक्ति पीजीआईएमएस में इलाज कराने आता था तो वह हमेशा उनकी पूरी मदद करती और आज जब वह दुनिया से चली गई है तब भी वह समाज के लिए एक नेक कार्य कर गई है। उन्होंने बताया कि महिला ने हमेशा अपने परिवार को एक मजबूत स्तंभ की तरह संभाल के रखा जिसके चलते आज उनके सभी बच्चे बहुत अच्छे पदों पर कार्यरत हैं और देश की सेवा कर रहे हैं।
सोटो कार्यालय से प्राप्त करें दान की जानकारी
सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अंगदान के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय स्थित स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के ऑफिस से कार्य दिवस पर आकर जानकारी प्राप्त कर सकता है।
अंगदान की टीम ने हाथ जोड़कर किया धन्यवाद
ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दीप्ति कुमारी व रोहित ने बताया कि महिला का पार्थिव शरीर परिवार को सौंपते हुए अंगदान प्रक्रिया में शामिल संपूर्ण टीम के साथ कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना, निदेशक डॉ. एसएस लोहचब, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल, डॉ. ईश्वर सिंह, सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह, डॉ. तरुण, दीप्ति कुमारी, रोहित सहित समस्त स्टाफ ने हाथ जोड़कर संपूर्ण परिवार का धन्यवाद व्यक्त किया।
अंगदान व किडनी ट्रांसप्लांट में शामिल रही ये सदस्य
कुलपति डॉ. अनिता सक्सेना, निदेशक डाॅ. एसएस लोहचब, चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. कुंदन, न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डाॅ. ईश्वर सिंह, डाॅ. गोपाल, सोटो नोडल अफसर डाॅ. सुखबीर सिंह, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दिप्ती कुमारी, आईईसी कंसलटेंट राजेश कुमार, रेनू कुमारी, डाॅ. गौरव शंकर पांडे, डाॅ. विवेक ठाकुर, डाॅ. अंकुर गोयल, डाॅ. अरूण दुआ, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर रोहित आदि कई चिकित्सक व कर्मचारियों ने इस अंगदान व किडनी ट्रांसप्लांट में अपना अहम योगदान निभाया। डॉ. अनीता सक्सेना ने टीम में शामिल सभी सदस्यों का धन्यवाद व्यक्त किया।
संस्थान की तरफ से दी श्रद्धांजलि
निदेशक डॉक्टर एसएस लोहचब ने रविवार को महिला के गांव में पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देकर परिवार को सांत्वना दी और अंगदान के इस महान कार्य के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।