चुनाव आयोग ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीख में बदलाव कर दिया है। अब राज्य में एक अक्तूबर को मतदान के बजाय 5 अक्तूबर 2024 को होंगे। वहीं, वोटों की गिनती अब आठ अक्तूबर को होगी जो पहले 4 अक्तूबर को होनी थी। हालांकि नामांकन की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्य में नामांकन 5 सितंबर से ही होंगे। भाजपा, इनेलो और बिश्नोई समाज ने मतदान की तारीख में बदलाव की मांग की थी।
चुनाव आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि यह फैसला बिश्नोई समुदाय के मतदान के अधिकार और परंपराओं का सम्मान करने के लिए लिया गया है, जिन्होंने अपने गुरु जम्भेश्वर की याद में 300-400 साल पुरानी प्रथा को बरकरार रखा है। मतदान की तारीखों में बदलाव के लिए अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा ने भी पत्र लिखा था।
जानिए किसने क्या कहा
भाजपा चुनाव से भाग रही है जबकि कांग्रेस पूरी तरह तैयार है। चुनाव आयोग भाजपा के इशारों पर चल रहा है और उसे 4 दिन का जीवनदान दिया है। छुट्टी तो पहले भी थी और छुट्टी वाले दिन ही मतदान है। मतदान तो पहले भी करवाए जा सकते थे।
- उदयभान, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष
जब भाजपा ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था तो उसी दौरान मैंने कहा था कि भाजपा हार मान चुकी है। चुनाव आयोग का अधिकार है। उन्होंने तारीख बढ़ा दी तो ठीक है।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम
मैं चुनाव आयोग को धन्यवाद कहना चाहता हूं। हमारे प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली में चुनाव आयोग को अवगत कराया था कि लगातार छुट्टियों की वजह से मतदान प्रतिशत पर असर पड़ सकता है। बिश्नोई महासभा ने भी राजस्थान में धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए तारीख बढ़ाने की अपील की थी। अब मतदान पर असर पड़ता नहीं पड़ेगा।
- नायब सिंह सैनी, सीएम हरियाणा
विज बोले- चुनाव आयोग के आभारी
हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीख 1 अक्तूबर से बढ़ाकर 5 करने के चुनाव आयोग के फैसले पर बीजेपी नेता अनिल विज ने कहा कि हम चुनाव आयोग के आभारी हैं, उन्होंने हमारे आवेदन पर कार्रवाई की और तारीखें बदल दीं। लोगों को 5 छुट्टियां मिलतीं और संभावना होती कि लोग छुट्टियों या जरूरी काम के लिए जाते और इससे वोट प्रतिशत में कमी आ सकती थी...कांग्रेस बिना किसी कारण के बातें कहती रहती है।''
आयोग का कर्तव्य
बीजेपी सांसद बिप्लब कुमार देब कहते हैं, ''...यह चुनाव आयोग का कर्तव्य है। उस समय बिश्नोई समुदाय का मुख्य त्योहार होता है, इसलिए चुनाव आयोग चाहता है कि चुनाव में अधिक से अधिक मतदान हो और हम इसका स्वागत करते हैं। हमने राज्य में ईमानदारी से काम किया है और जनता तय करेगी कि कौन जीतेगा।
बताया अच्छा निर्णय
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता कविंदर गुप्ता ने कहा कि जो वजह बताई गई है वो ये है कि हरियाणा में बिश्नोई समुदाय का ये सदियों पुराना त्योहार है और लोग इसमें शामिल हो सकते हैं.'', एक अच्छा निर्णय लिया गया है...हम निर्णय का स्वागत करते हैं।
पहने नहीं पता था कि त्यौहार है
जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष तारिक हमीद ने कहा कि क्या चुनाव आयोग को उस समय पता नहीं था कि कोई त्यौहार है? उन्होंने हर चीज पर विचार करने के बाद अंतिम तारीख की घोषणा की। वे चुनाव को संदिग्ध बना रहे हैं।
कांग्रेस के समर्थन में उमड़े इस जनसैलाब का ही भय है कि हार के डर से भाजपा ने चुनाव की तारीख बदलवा दी है, लेकिन उनकी हार निश्चित हैI
-कुमारी सैलजा ने एक्स पर की पोस्ट
बिश्नोई समाज का मतदान कम पड़ता
बिश्नोई महासभा ने पत्र में लिखा था कि गुरु जंभेश्वर की याद में हर साल आसोज की अमावस्या पर बीकानेर के मुकाम गांव में धार्मिक अनुष्ठान होता है। इस बार यह त्योहार एक व दो अक्तूबर को पड़ रहा है। इसमें हिस्सा लेने के लिए हरियाणा के कई शहरों में रहने वाले बिश्नोई समाज के लोग राजस्थान जाते हैं। एक को ही हजारों लोग बीकानेर पहुंच जाएंगे, जिससे वे वोटिंग के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। हरियाणा के भिवानी, हिसार, सिरसा और फतेहाबाद में बिश्नोई समाज के करीब सवा लाख लोग रहते हैं। इससे हिसार, आदमपुर, बरवाला, नलवा, उकलाना, फतेहाबाद, टोहाना, ऐलनाबाद, सिरसा विधानसभा में मतदान प्रभावित होने की संभावना थी। इस वजह से मतदान की तारीख बदलने की मांग की थी।
अब प्रचार के लिए चार दिन और मिलेंगे
मतदान की तारीख में बदलाव से राजनीतिक दलों को प्रचार के लिए 4 दिन और मिल जाएंगे और उम्मीदवार तीन अक्तूबर तक प्रचार कर सकेंगे। वहीं, आचार संहिता की मियाद बढ़ जाएगी। पहले छह अक्तूबर तक आचार संहिता लागू थी। अब 10 अक्तूबर तक लागू रहेगी। वहीं, एग्जिट पोल भी अब पांच अक्तूबर की शाम को जारी हो सकेंगे।
भाजपा ने दी थी लंबी छुट्टियों की दलील
भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने पत्र लिख चुनाव आयोग को मतदान की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने अपने पत्र में दलील दी कि एक अक्तूबर के पहले और बाद में छुट्टियां पड़ रही हैं। एक साथ इतनी छुट्टियां होने की वजह से लोग प्रदेश से बाहर घूमने जा सकते हैं। इससे मतदान प्रतिशत में अंतर पड़ सकता है। इनेलो ने भी यही कहा था कि लंबी छुट्टियां होने की वजह से मतदान में करीब दस से 15 फीसदी का अंतर पड़ सकता है।
इससे पहले भी तारीखों में बदलाव हुआ है
पिछले साल राजस्थान विधानसभा चुनाव में तारीख बदलकर 23 के बजाय 25 नवंबर की गई थी। 23 को देवोत्थान एकादशी थी। इस दिन राजस्थान में बड़ी संख्या में शादी समारोह व मांगलिक कार्यक्रम होते हैं। 2022 में पंजाब विधानसभा में आयोग ने गुरु रविदास जयंती के लिए वाराणसी जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मतदान को एक सप्ताह आगे बढ़ा दिया था। मणिपुर में 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान, आयोग ने ईसाई समुदाय की रविवार की प्रार्थनाओं का सम्मान करने के लिए मतदान की तारीखें बदल दीं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012 में बारावफात के कारण मतदान की तारीख बदल दी गई थी।
...इसलिए भाजपा को फायदा
तारीख बदलने का फायदा भाजपा को मिल सकता है। एक तो उन्हें प्रचार करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। पिछले दिनों केंद्र व राज्य की ओर से कुछ बड़े फैसले लिए गए हैं, उन्हें अब जमीन लाने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। वहीं, बिश्नोई समाज के बड़े नेता कुलदीप बिश्नोई भाजपा में हैं। उनका बिश्नोई समाज में अच्छा रसूख है। अब उनकी अपील का भी ज्यादा असर पड़ेगा।