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नगर निगम का फर्नीचर घोटाले की जांच की आंच में मेयर, सीनियर डिप्टी और डिप्टी की कुर्सी जानी तय

Tue, 30 May 2017 02:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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दोनों प्रापर्टी आईडी और नक्शे अलग-अलग नाम से जारी किये गये - फोटो : demo pic
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नगर निगम के फर्नीचर घोटाले की जांच आखिरी चरण में पहुंच गई हैं। इसके चलते मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा और डिप्टी मेयर अशोक भाटी की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने भी शहरी निकाय मंत्री कविता जैन की ओर से भेजी गई फाइल को मंजूरी दे दी है। एक सप्ताह में शहरी निकाय विभाग तीनों पदाधिकारियों को सस्पेंड करने और निगम के दोनों अधिकारियों म्यूनिसिपल इंजीनियर जगदीश और अकाउंटेंट विकास गुलिया के खिलाफ विभागीय जांच के आर्डर जारी कर सकता है।
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कहा जा रहा है कि छह मई को शहरी निकाय मंत्री ने विजिलेंस जांच रिपोर्ट के साथ नगर निगम रोहतक के फर्नीचर मामले की फाइल नंबर 11081 सीएम हाउस भेजी। शहरी निकाय विभाग के मुख्य सचिव राकेश गुप्ता ने फाइल को मुख्यमंत्री के सामने रखा। सीएम से हरी झंडी मिलने के बाद फाइल सोमवार को शहरी निकाय मंत्री के कार्यालय में पहुंच गई। फाइल के साथ सीएम हाउस की तरफ से अलग से नोट बनाकर भेजा गया है जिसमें लिखा है कि कार्रवाई की अनुमति दी जाती है।

मंत्री गुरुग्राम में व्यस्त, नहीं हो सके आर्डर पर हस्ताक्षर

केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर गुरुग्राम में केबिनेट मंत्री कविता जैन ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के सदस्यों की मीटिंग ली। वहां व्यस्त होने के कारण आर्डर पर हस्ताक्षर नहीं हो सके। अगर मंगलवार को केबिनेट मंत्री चंडीगढ़ पहुंची तो फाइल पहले वित्तायुक्त के पास जाएगी। वहां से मंडल आयुक्त चंद्रप्रकाश के पास जाएगी। इसके बाद आर्डर जारी होंगे।
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 अपडेट लेते नजर आए कांग्रेसी पार्षद

सीएम हाउस से हरी झंडी मिलने की भनक सोमवार को कांग्रेसी पार्षदों को भी लग गई। वे एक-दूसरे से मामले को लेकर अपडेट लेते नजर आए।

एक साल ही बचा है पार्षदों का कार्यकाल

हुड्डा सरकार ने 2010 नगर परिषद को भंग करके नगर निगम का दर्जा दिया था। पहला चुनाव दो जून 2013 को हुआ था। जून 2018 में पार्षदों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। ऐसे में मौजूदा पार्षदों के कार्यकाल में मात्र एक साल रह गया है। अगर फर्नीचर खरीद मामले में कार्रवाई होती है तो निगम की राजनीति में उथल-पुथल मचना तय है।

दो साल से विजिलेंस जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई का इंतजार  

नगर निगम हाउस ने 2014 में हर वार्ड के अंदर पब्लिक सुविधा केंद्र खोलने के लिए फर्नीचर खरीदने का फैसला किया गया। इसके लिए तीन कोटेशन मंगवाई गई। एक फर्नीचर व्यापारी से 18 लाख से ज्यादा में फर्नीचर खरीदा गया। जनवरी 2015 में निगम की ओर से राशि जारी कर दी गई। तभी सवाल उठने लगे कि निगम ने यह फर्नीचर मार्केट रेट से ज्यादा पैसे में खरीदा है। बाद में फर्नीचर सप्लाई करने वाले व्यापारी ने एक लाख 42 हजार रुपये का चैक वापस निगम के खाते में जमा करवा दिया। जांच के दौरान केस की प्रापर्टी मानकर निगम की अकाउंट ब्रांच ने अभी तक चैक को भुनाया नहीं है। मामले की पहले ट्रेनिंग पर आए आईएएस अधिकारी विक्रम सिंह ने जांच की। 2016 में विजिलेंस ने ज पड़ताल की। विजिलेंस ने जांच में फर्नीचर की खरीद में वित्तीय अनियमितता मानी है। पिछले साल अक्टूबर माह से विजिलेंस की जांच रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय में कार्यालयों के चक्कर काट रही है।

वर्जन
सीएम ने रोहतक नगर निगम की मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर को सस्पेंड करने और निगम अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की अनुमति दे दी है। मेरे कार्यालय में फाइल आ गई है। सोमवार को गुरुग्राम में मीटिंग के चलते व्यस्त रही। जल्द ही आर्डर जारी कर दिए जाएंगे। भ्रष्टाचार को लेकर कोई समझौता नहीं होगा।
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-कविता जैन, केबिनेट एवं शहरी निकाय मंत्री।
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