मौजूदा सरकार ने जहां नई खेल नीति लागू कर खेल को बढ़ावा दे रही वही, अर्जुन, द्रोणाचार्य व ध्यानचंद अवार्डियों को पेंशन देना भूल गई है। प्रदेश के 76 अर्जुन अवार्डियों के अलावा 14 द्रोणाचार्य और 7 ध्यानचंद अवार्डी को पिछले पांच महीने से पेंशन नहीं मिल रही है। सरकार की ओर से हर महीने उनको 5 हजार रुपये की पेंशन दी जाती है, लेकिन पिछले पांच महीने से पेंशन नहीं मिली। इस बारे में उनको अधिकारियों से भी कोई जानकारी नहीं मिलती है और अधिकारी इस मामले को सरकार के स्तर का बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड दिया गया तो कोच को अच्छे खिलाड़ी देने पर द्रोणाचार्य अवार्ड दिया गया। इनके अलावा हॉकी के खिलाड़ियों को ध्यानचंद अवार्ड दिया गया। इन सभी को अवार्ड देने के साथ ही 5 हजार रुपये की पेंशन शुरू की गई। यह पेंशन हर महीने दी जाती थी। सरकार ने पेंशन को शुरू जरूर कर दिया, लेकिन उनको यह पेंशन पिछले पांच महीने से नहीं मिल रही है। इससे पहले भी एक बार उनको छह महीने तक पेंशन नहीं मिली थी, लेकिन अधिकारियों से मिलकर समस्या बताने के बाद पेंशन मिल गई थी। वहीं अब अधिकारी इस मामले को सरकार के स्तर का बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
अर्जुन अवार्डी बॉक्सर जितेन्द्र ने बताया कि पेंशन पिछले कई महीने से नहीं मिल रही है और इससे पहले भी इस तरह की समस्या आयी थी। उस समय भी अधिकारियों से बात करने के बाद ही पेंशन दी गई थी। वहीं जिला खेल अधिकारी ओमपति मल्हान ने बताया कि यह पेंशन कई महीने की इकट्ठी दी जाती है, अवार्डियों के खाते में जरूर पहुंचा दी जाती है।