इस वर्ष जिला सामान्य अस्पताल 100 से 200 बेड का हो गया। यह जिलेभर के लोगों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छी खबर रही है। सामान्य अस्पताल में जिलेभर से मरीज इलाज के लिए आते हैं।
कम बेड होने के कारण कई मरीजों को पीजीआई रेफर करना पड़ता था। लेकिन, 200 बेड का अस्पताल हो जाने के बाद अब ज्यादातर मरीजों को सामान्य अस्पताल में ही इलाज मिल रहा है। इससे पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान (पीजीआईएमएस) पर भी भार कम हुआ है। इसके अलावा इस वर्ष ही चार-चार बेड के एचडीयू (हाई-डिपेंडेंसी यूनिट) और आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) मिला। इससे गंभीर नवजात शिशुओं को और गंभीर मरीजों को भी राहत मिली। पीजीआई के बाद शहरवासियों का नागरिक अस्पताल एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। यहां बेहतर इलाज मिल रहा है।
एक नजर में अस्पताल
-रोजाना औसतन 1700 मरीजों की ओपीडी लगती है।
-औसतन 100 मरीज रोज भर्ती होते हैं।
-250 से ज्यादा छोटे-बड़े ऑपरेशन होते हैं।
-100 के करीब नर्सिंग स्टाफ है।
-40 के करीब डॉक्टर हैं।
यह सुविधाएं उपलब्ध
यहां जांच के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। विभिन्न रोगों का इलाज कराने के लिए संबंधित चिकित्सक की ओपीडी में मरीज पहुंचते हैं। इसके अलावा ऑडियोमीटरी रूम है। हाल ही में नवजात की बेहतर चिकित्सा के लिए एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) स्थापित की गई है, साथ ही यहां नीकू भी स्थापित है।
जरूरतमंदों की सेवा करना पहल फर्ज है। यही कारण है स्वास्थ्य विभाग लगातार क्षमता को बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में 100 बेड के सामान्य अस्पताल को 200 बेड का किया गया है। यहां बेहतर इलाज उपलब्ध है।
-डॉ. रमेश चंद्र, सिविल सर्जन।
पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू
पीजीआई में इस वर्ष किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू हुई है। यह किडनी के मरीजों के लिए बड़ी राहत है। इसके साथ ही अंग दान भी होने लगे हैं। ब्रेन डेड मरीज के अंग दान कर इस वर्ष करीब पांच से ज्यादा मरीजों के किडनी ट्रांसप्लांट की जा चुकी हैं। इसके अलावा अन्य अंगों को एम्स व दूसरे अस्पतालों को देकर उनकी जरूरत वाले मरीजों को भी नया जीवन दिया गया है। पिछले काफी समय में पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने का प्रयास किया जा रहा था। इससे प्रदेश के मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ नहीं जाना होगा।
-फोटो 54 : चंडीगढ़ नाइट रन में भाग लेते बीआरजी के धावक। स्रोत ग्रुप