हरियाणा ही वह पवित्र धरती है, जहां से कभी भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। इस हरियाणा की धरती से दुनिया में गीता का उपदेश पहुंचा था। इस उपदेश को विदेशी भी मान रहे हैं। इस उपदेश पर सभी को अमल करना चाहिए। केवल गीता ही नहीं, बल्कि हरियाणा की पावन धरती पर ही सरस्वती का उद्गम हुआ है। ऐसी पावन धरती पर भाईचारा टूटना बड़ा विचारणीय है।
सद्भावना सम्मेलन भले ही हरियाणा में पिछले दिनों हुए दंगों के जख्मों पर मरहम लगाने और आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए हुआ हो। लेकिन उसके साथ ही गीता की धरती हरियाणा से पूरे देश को एकजुटता का संदेश दिया गया। सबसे पहले स्वामी परम चैतन्य ने कहा कि गीता का उपदेश देने के लिए हरियाणा की धरती पर भगवान श्रीकृष्ण आये थे। इसलिए भी यह धरती सबसे अहम मानी जाती है।
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि समरसता व सद्भावना का संदेश ही गीता से दिया गया था और उस संदेश को आज भी जीवन में उतारना जरूरी है। स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि हरियाणा की धरती को रणक्षेत्र या युद्धक्षेत्र भी कहा जा सकता था, लेकिन गीता के उपदेशों के कारण इसे धर्मक्षेत्र कहा जाता है। साध्वी अमृता ने कहा कि जिस धरती से गीता का उपदेश दिया गया हो और मां सरस्वती का उद्गम हुआ हो, वहां समरसता खुद कायम रहनी चाहिए। लेकिन अब गीता के उपदेशों को अपनाकर ही भाईचारा कायम रखना है, जिसे कभी बिगड़ने नहीं देना है। इस तरह कई संतों ने गीता के सहारे सद्भाव का संदेश दिया और कहा कि हरियाणा की धरती से निकले जिन उपदेशों को सभी मान रहे हैं, उनको यहां के लोगों को फिर अपनाना होगा।