अब तक फिल्मों में देखा था प्यार की जीत होती है। अब जिला अदालत में भी ऐसी कहानी सामने आई है, जबकि एक युवती अपने बयान पर अडिग रही और प्रेमी को सलाखों से दूसरी बार बाहर ले आई। युवती के बयान व साक्ष्यों के आधार पर एएसजे नरेश कुमार की अदालत ने नाबालिग के अपहरण के आरोपी को बरी कर दिया। साथ में उसके पिता को भी क्लीनचिट दे दी।
दूसरी बार जज के सामने दिए बयान पर अड़ी रही युवती
बचाव पक्ष के वकील ओपी चुघ ने बताया कि छह साल पहले झज्जर में एक महिला ने शिकायत दी कि रोहतक का युवक उसकी नाबालिग लड़की को बहला-फुसला कर ले गया। पुलिस ने जब लड़की को अदालत में पेश किया तो उसने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत जज के सामने बयान दिया कि वह बालिग है और उसकी उम्र साढ़े 18 साल है।
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माता-पिता नहीं साबित कर सके, उनकी बेटी है नाबालिग
2018 में अदालत आरोपी युवक को बरी कर दिया। झज्जर कोर्ट से बरी होने के बाद रोहतक पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया। क्योंकि लड़की की मां ने उसके खिलाफ पीजीआईएमएस थाने में केस दर्ज करवा दिया था। पुलिस ने आरोपी प्रेमी को अदालत में पेश किया, लड़की ने फिर जज के सामने कहा कि वह बालिग है। साथ ही युवक के साथ ही रहना चाहती हूं। साथ ही अपनी मर्जी से युवक के साथ गई थी। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी।
मां साबित नहीं कर सकी बेटी नाबालिग
युवती की मां ने शिकायत में कहा था कि उसकी बेटी नाबालिग है। इसके लिए जन्म प्रमाण पत्र भी पेश किया। हालांकि वह जन्मप्रमाण हरियाणा से बना हुआ था। जबकि बयान में माना था कि बेटी दिल्ली पैदा हुई थी। पुलिस भी दिल्ली का जन्म प्रमाण पत्र नहीं ला सकी।