ठेठ पंजाबी व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं प्रवीण
कुलपति ने कहा कि प्रवीण ठेठ (टिपिकल) पंजाबी होने के चलते अक्सर पंजाबी में ही बातचीत करते थे। वह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं। कॉमनवेल्थ व एडियाड में मेडल जीतने के अलावा ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। खेलों में उनके बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें अर्जुन अवार्ड भी दिया गया। दिल्ली के खेल गांव में एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा गया। इसे लेकर मैं और अर्जुन अक्सर मजाक करते थे कि सड़क का नाम तो मरने के बाद रखा जाता है। यहां तो जिंदा आदमी के नाम ही रख दिया है। इस पर प्रवीण हंस कहते, कोई नी सरकार दी मर्जी।
28 दिसंबर को हुई थी आखिरी बार बातचीत
प्रवीण कुमार से मेरी आखिरी बार बातचीत 28 दिसंबर को हुई थी। उस दिन प्रवीण का फोन आया था। उन्हें किसी का मोबाइल नंबर चाहिए था। तब उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा था। उस समय उन्होंने कहा कि सब ठीक है। इसके बाद बातचीत नहीं हुई। मंगलवार सुबह हमेशा के लिए बिछड़ने की खबर आई तो घर संपर्क किया, मगर किसी से बात नहीं हो सकी।
उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। उनका निभाया किरदार अविस्मरणीय है। जिस तरह रामायण में हनुमानजी के किरदार के लिए दारा सिंह को नहीं भुलाया जा सकता, उसकी तरह भीम के किरदार के लिए प्रवीण कुमार को नहीं भुलाया जा सकता है।