दूसरे प्रदेशों से ब्याह कर लाई गई बहुओं (पारो) को एससी सीट पर चुनाव लड़ाने की रणनीति कहीं कामयाब तो कहीं मायूसी भरी रही। एससी के लिए रिजर्व इन गांवों में सवर्ण परिवार में ब्याह कर आई इन बहुओं ने अपनी पिता की जाति के आधार पर चौधर की ताल ठोंकी थी।
गद्दी खेड़ी गांव में गोरखपुर से ब्याह कर लाई गई बहू मीना को चौधर का ताज पहना भी दिया। मीना ने गांव के 8 एससी उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की। वहीं भालौट के वोटरों ने एससी सीट पर उतरी सवर्ण बहू पारो को नकार दिया और उसे हार का मुंह देखना पड़ा।
चौधर की जंग में लोगों ने कुर्सी कब्जाने के लिए खूब पैंतरे अपनाए। गांवों में सरपंची का पद एससी बिरादरी के लिए आरक्षित हुआ तो चौधर के लिए ऐसा जुगाड़ लगा दिया, जिससे पार पाना विपक्षियों को नामुमकिन लग रहा था। स्वर्ण जाति के लोग यूपी से एससी बहू को ब्याहकर लाये और एससी प्रत्याशियों के सामने उतार दिया।
रोहतक ब्लॉक के दो गांवों में ऐसा मामला सामने आया। गद्दी खेड़ी में जाट परिवार यूपी के गोरखपुर से मीना को ब्याहकर लाया और एससी सीट होने के कारण मौका देख उसे चुनाव में उतार दिया। मीना ने भी खूब मोर्चा बांधा और 136 वोटों से जीत मिली तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है।
इस तरह ही भालौठ गांव में स्वर्ण जाति में ब्याहकर लाई गई सोनिया को भी मैदान में उतारा गया। वह भी कई प्रत्याशियों को टक्कर दे रही थी, लेकिन उसे जाट बाहुल्य गांव में नकार दिया गया।