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कमजोर इम्युनिटी वालों को अपनी पकड़ में ले रहा फंगल : कुलपति

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10. पीजीआई में आयोजित रिसेंट्स अपडेट्स इन फंगल इंफेक्शन विषय पर आयोजित सीएमई में कुलपति डाॅ. एच
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रोहतक। फंगल इंफेक्शन पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी खतरनाक फंगल डिजीज से निपटने के लिए नए रिसर्च और डेवलपमेंट की तत्काल जरूरत बताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फंगल बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, यह चिंता का विषय हैं इसलिए हम सभी को मिलकर इसके संबंध में रिसर्च करनी चाहिए। यह कहना है पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एचके अग्रवाल का।
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वह शनिवार को माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से इंडियन सोसाइटी ऑफ मेडिकल माइक्रोलोजिस्ट के साथ मिलकर लेक्चर थिएटर वन में रिसेंट अपडेट्स इन फंगल इंफेक्शन विषय पर आयोजित सीएमई (कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि नाॅन कल्चर परीक्षण भी देखा जाना चाहिए।
कुलपति ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में फंगल संक्रमण का उपचार महत्वपूर्ण है। मधुमेह और इम्युनो कॉम्प्रोमाइज्ड स्थिति में संक्रमण बढ़ रहे हैं। निदान में देरी एक बड़ी चुनौती है। नॉन-कल्चर तकनीक महत्वपूर्ण है। नमी और पसीने के कारण संक्रमण तेजी से फैलते हैं।
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खासकर मधुमेह व इम्युनो कॉम्प्रोमाइज व्यक्तियों में इसकी संभावना ज्यादा रहती है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि फंगल इन्फेक्शन के मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। यह चिंताजनक है।
पीजीआई निदेशक डाॅ. एसके सिंघल ने कहा कि फंगल इंफेक्शन का दायरा बढ़ रहा है। हम सभी ने कोविड में म्यूकोरमाइकोसिस की तबाही देखी है। वर्तमान में नए डायग्नोस्टिक टूल्स आ रहे हैं। यह दिशा देने में योगदान करेंगे। हमें भविष्य की रणनीतियां तैयार करनी होगी ताकि इस प्रकार की महामारी से निपटने में पूर्ण रूप से सक्षम हों।
कुलसचिव डाॅ. रूपसिंह ने बताया कि फंगल इन्फेक्शन के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लाल, खुजलीदार त्वचा, नाखूनों का रंग बदलने के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. कुंदन मित्तल ने कहा कि संस्थान में बाहर से आए विशेषज्ञों का अनुभव चिकित्सकों का ज्ञान बढ़ाएगा। इससे मरीजों को भी राहत मिलेगी।
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डाॅ. अर्पणा परमार ने कहा कि सीएमई का उद्देश्य महामारी के बाद विशेष रूप से बढ़े हुए फंगल संक्रमणों के निदान और प्रबंधन में नवीनतम प्रगति पर अपडेट प्रदान करना है।
ऑर्गेनाइजिंग सचिव डाॅ. पारुल पुनिया ने कहा कि कार्यक्रम में फंगल संक्रमण के निदान के लिए नॉन-कल्चर आधारित तकनीकों पर चर्चा हुई। इसमें सेरोलॉजी, मॉलिक्यूलर और हिस्टोपैथोलॉजी शामिल हैं। इस मौके पर डाॅ. डीआर अरोड़ा, डाॅ. उमा, डाॅ. मधु शर्मा, डाॅ. निधि, डाॅ. पीएस गिल, डाॅ. अंतरिक्ष, डाॅ. किरण बाला, डाॅ. रितु अग्रवाल, डाॅ. प्रियंका, डाॅ. सूची समेत दर्जनों चिकित्सक उपस्थित रहे।
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