शहर के व्यापारियों को नगर निगम राहत देने की तैयारी कर रहा है। नए वित्त वर्ष साल 2020 - 21 में मीट व पटाखा विक्रेता और वाशिंग सर्विस स्टेशन मालिकों को छोड़कर शहर के करीब 35 हजार व्यापारियों को ट्रेड लाइसेंस नहीं लेना पड़ेगा। पिछले सप्ताह सीएम ने मेयर व आयुक्तों से बातचीत करके ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता को चयनित श्रेणी के लिए खत्म करने को हरी झंडी दी है। निगम को अब मुख्यालय से नोटिफिकेशन का इंतजार है। वहीं, निगम के फैसले का शहर के व्यापारियों ने स्वागत किया है।
नगर निगम एरिया में कारोबार करने वाले व्यापारियों को हर साल ट्रेड लाइसेंस लेना पड़ता था। इसके लिए निश्चित मात्रा में फीस वसूली जाती है। यह फीस एरिया व कारोबार के हिसाब से अलग-अलग होती थी। हालांकि लाइसेंस लेने के साथ व्यापारी को पिछले साल का जीएसटी व इनकम टैक्स का पूरा ब्योरा देना पड़ता था। साथ ही पैन नंबर भी मांगा जाता था। इससे व्यापारियों में काफी नाराजगी थी। उनका कहना था कि वे पहले से जीएसटी, आयकर, प्रापर्टी टैक्स व स्वच्छता टैक्स दे रहे हैं। ऊपर से ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए निगम लगातार दबाव बनाता है। टैक्स व जीएसटी से जुड़े कागजात देने से उनके कारोबार की गोपनीयता भंग हो सकती है। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सीएम मनोहर लाल ने सर्किट हाउस में व्यापारियों के प्रदेश स्तरीय शिष्टमंडल के साथ मीटिंग की थी। उस मीटिंग में भी रोहतक के व्यापारियों ने सीएम के सामने ट्रेड लाइसेंस खत्म करने की मांग की थी। सीएम ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया था।
निगम पर नहीं पड़ेगा ज्यादा असर, मात्र 500 ने लिया था ट्रेड लाइसेंस
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में 35 हजार से ज्यादा पंजीकृत व्यापारी हैं। इसमें किला रोड, शौरी मार्केट, रेलवे रोड, झज्जर रोड, सिविल रोड, दिल्ली गेट, झज्जर चुंगी, हिसार रोड, सुखपुरा चौक, डी पार्क, पावर हाउस व दिल्ली चौक से लेकर शीला बाईपास तक के एरिया में व्यापारियों की संख्या ज्यादा है। इसके बावजूद मात्र 500 व्यापारियों ने ही ट्रेड लाइसेंस लिया था या रिन्यू करवाया था। सूत्रों के अनुसार साल में मात्र 50 लाख की आमदनी ट्रेड लाइसेंस से हुई है।
तीन श्रेणी को ट्रेड लाइसेंस लेना इसलिए किया जरूरी
सूत्रों के अनुसार सरकार की मंशा है कि मीट व पटाखा कारोबार पर नियंत्रण रखा जाए। क्योंकि मीट के कारोबार में जीवों की हत्या होती है, जबकि पटाखा कारोबार पर्यावरण के लिए घातक है। वहीं, भूमिगत जल का दोहन करके वाशिंग सर्विस स्टेशन भविष्य के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं। ऐसे में तीनों कारोबार के लिए निगम से हर साल ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य रहेगा।
10 निगमों के मेयरों ने सीएम के सामने ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग रखी थी। सीएम ने एक सप्ताह पहले हुई मीटिंग में इसके लिए हरी झंडी दे दी थी। हालांकि कुछ श्रेणी के व्यापारियों को अब भी ट्रेड लाइसेंस लेना होगा।
मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
सीएम के साथ मीटिंग में ट्रेड लाइसेंस को लेकर चर्चा हुई। सहमति बनी कि तीन-चार श्रेणी को छोड़कर अन्य कारोबारियों के लिए ट्रेड लाइसेंस लेने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया जाए। नए वित्त वर्ष से पहले इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। फैसले से रोहतक निगम को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि 35 हजार व्यापारियों में से मात्र 500 ने ही मौजूदा वित्त वर्ष में लाइसेंस लिया था।
- प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम
लंबे समय से व्यापारी ट्रेड लाइसेंस की शर्त को खत्म करने की मांग कर रहे थे। सीएम के सामने 2018 में भी इस संबंध में मांग पत्र दिया था। साथ ही विधानसभा चुनाव से पहले भी मुद्दा उठाया गया था। क्योंकि व्यापारी पहले से कई तरह के टैक्सों के बोझ के नीचे दबे हुए हैं। नगर निगम के फैसले से छोटे व्यापारियों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।
गुलशन निझावन, महासचिव रोहतक व्यापार मंडल
कई बार व्यापारियों के हित में आवाज उठाई और तत्कालीन सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के सामने प्रस्ताव रखा। ग्रोवर ने भी रोहतक के व्यापारियों की मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। इसके लिए वे ग्रोवर का धन्यवाद व्यक्त करते हैं।
राजू भुटानी, व्यापारी नेता झज्जर रोड