रोहतक। कोरोना संक्रमणकाल में वेंटीलेटर व ऑक्सीजन पर चल रहे गंभीर कोरोना के मरीजों का हाल जानने के लिए तीमारदार बेहाल हैं। सुबह-सायं मरीज की डेली रिपोर्ट बताना तो दूर फोन पर सूचना देने से भी बचा जा रहा है। अब तो पीजीआईएमएस के प्रशासनिक अधिकारियों में पत्रबाजी शुरू हो गई है कि वह इसके लिए ड्यूटी तय करें कि कौन मरीज की जानकारी देगा। इस संबंध में अधिकारिक रूप से ट्रामा सेंटर प्रभारी पत्र भी जारी कर चुके हैं।
कोविड अस्पताल के रूप में काम कर रहे ट्रामा सेंटर के बाहर कोरोना संक्रमितों के तीमारदार नम आंखों के साथ अपने मरीज की एक जानकारी पाने को भटकते रहते हैं। संक्रमण से बचाने के चलते किसी तीमारदार को ट्रामा सेंटर के गेट पर भी खड़ा नहीं होने दिया जाता। सीटी स्कैन करवाने वाले रास्ते व ट्रामा सेंटर के पीछे वाले रास्ते पर तीमारदार प्रयास करते हैं कि कोई डॉक्टर, स्टाफ, नर्स ही उनके मरीज के बारे में उन्हें कोई जानकारी दे दे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाता, मरीज फोन पर बात करते हैं तो पहले से कोई फोन नहीं उठाता और उठाता है तो जवाब नहीं मिलता। ऐसे में मरीज के साथ बाहर इंतजार में खड़े तीमारदारों की मनोदशा और दयनीय हो जाती है।
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ट्रामा प्रभारी ने कन्वीनर को लिखा पत्र
ट्रामा सेंटर प्रभारी एसके सिंघल ने कन्वीनर डॉ. वीके कत्याल को पत्र लिखा है कि कोरोना के मरीजों के फोन उनके पास आते हैं। कोविड हेल्प लाइन वाले उनका निजी मोबाइल नंबर परिजनों को दे देते हैं। वह कैसे हर मरीज हा हाल बता सकते हैं। यह समस्या आम मरीज ही नहीं डॉक्टरों के साथ भी है, जोकि संक्रमण के बाद उपचाराधीन होते हैं। इसके लिए मेडिसिन विभाग कंसलटेंट की लिस्ट व नंबर जारी करें ताकि समस्या ना हो। इस पर डॉ. वीके कत्याल का कहना है कि ट्रामा सेंटर एनेस्थिसिया विभाग के अंडर है। यहां तीन कमेटी बनाओ और इसमें टिकू, मेडिसिन कंसलटेंट व डीएमएस का नंबर जारी करो ताकि वह मरीज के तीमारदारों को मरीज की हालत बता सकें।
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प्लाज्मा मांगने व तबीयत पूछने की व्यवस्था है, मरीज का हाल बताने की नहीं
हैरानी भरा ही सही लेकिन सत्य यही है कि पीजीआईएमएस ने कोरोना से ठीक हो चुके मरीज का प्लाज्मा लेने के लिए व होम आइसोलेशन में चल रहे मरीजों का हाल जानने के लिए हेल्पलाइन सेवा शुरू कर रखी है। लेकिन मरीज के तीमारदारों को सुबह-सायं उनके मरीज का हाल बताने की व्यवस्था नहीं कर रखी। ट्रामा सेंटर में एक बार मरीज के अंदर जाने के बाद तीमारदारों को यह भी नहीं पता होता कि मरीज की हालत कैसी है। क्योंकि यदि मरीज ठीक है तो उसे होम आइसोलेट कर दिया जाता है।