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ओडिशा से 48 घंटे में रोहतक पहुंचता है ऑक्सीजन का टैंकर

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मयंक तिवारी
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रोहतक। जिस ऑक्सीजन गैस को लेकर मारामारी मची हुई है, उसे ओडिशा से रोहतक पहुंचने में 48 घंटे का समय लगता है। जबकि खाली ऑक्सीजन का टैंकर वायुसेना के हिंडेन एयरवेज से ओडिशा एक घंटे 45 मिनट में पहुंचता है जिसकी ट्रेन से वापसी 13 घंटे में होती है। वायुसेना के चॉपर से ऑक्सीजन का टैंकर चालक व पुलिस के जवान के साथ हिंडेन से ओडिशा भेजा जाता है। जहां पर टैंकर में ऑक्सीजन भरवाने के बाद उसे ट्रेन से फरीदाबाद लाया जाता है। उसके बाद पुलिस पहरे में उसे टैंक तक पहुंचाया जाता है।
ऑक्सीजन का टैंकर कहां है इसकी पुलिस व प्रशासन के पास पल-पल की जानकारी रहती है। किस अस्पताल को ऑक्सीजन चाहिए इसका पूरा लेखाजोखा रखा जाता है। टैंकर को सुरक्षित लाने और समय से पहुंचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर पुलिस की टीम को लगाया गया है।
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पानीपत से भी शहर में आती है ऑक्सीजन
जिले को मिलने वाले कोटे के आधार पर शहर में पानीपत रिफाइनरी से भी ऑक्सीजन आती है। टैंकर खाली कर समय से पानीपत पहुंचाने के साथ ही उसे पुलिस स्कॉट के साथ प्लांट तक लाया जाता है। कई बार एक टैंकर में अन्य किसी जिले के कोटे की भी ऑक्सीजन होती है। उस दौरान अपने टैंकर को समय पर प्लांट तक लाना पुलिस के लिए चुनौती हो जाता है।
पुलिस स्कॉट में होते है दो मैकेनिक
टैंकर जब फरीदाबाद या पानीपत से चलता है तो उसके साथ दो मैकेनिक भी चलते हैं। कारण वाहन कहीं कुछ खराब हो जाए तो उसे ठीक कर तुरंत प्लांट तक पहुंचाया जाए। पुलिस टीम टैंकर की लोकेशन अपने अधिकारियों को देती रहती है। इतना ही नहीं टैंकर प्लांट पर पहुंचने, उसके खाली होने और बाटलिंग को लेकर एक-एक मिनट पर नजर रखी जाती है। फरीदाबाद से टैंकर को पुलिस पहरे में रोहतक तक पहुंचाया जाता है। उड़ीसा से ट्रेन पर चलने वाले आक्सीजन टैंकर की जानकारी स्कॉट की टीम आगरा पहुंचने से पहले लेने लगती है।
100 पुलिस जवानों का एडीसी व पुलिस हेडक्वार्टर के पास है जिम्मा
ऑक्सीजन को ओडिशा से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 100 पुलिस के जवानों को लगाया गया है। जो पीजीआई प्लांट से लेकर आडीसी प्लांट व ऑक्सीजन के टैंकर की पायलट में लगे हुए हैं। इनके शिफ्ट में परिवर्तन भी होता रहता है। इसके लिए प्रशासन की ओर से अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल व डीएसपी हेडक्वार्टर गोरखपाल राणा को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इतना ही नहीं इस पर निगरानी के लिए टैंकर के जीपीएस पर नजर रखी जाती है। पुलिसकर्मियों का एक व्हाट्सएप ग्रुप है। जिसमें पुलिस अधीक्षक भी हैं। पुलिस की ओर से पल-पल की जानकारी अपडेट होती रहती है।
टैंकर के चालक की खूब होती है खातिरदारी
ज्यादातर ऑक्सीजन के टैंकर गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार के हैं। इन तीनों शहरों में आक्सीजन के प्लांट हैं। इनके चालकों की सुविधा का ख्याल रखना पुलिस का ही जिम्मा है। पुलिस की ओर से चालक का पूरा खयाल रखा जाता है।
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यह है ऑक्सीजन की स्थिति
जिले में सबसे पहले 13 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की स्वीकृति हुई थी। जिसे बढ़ाकर 17 मीट्रिक टन कर दी गई है। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार की ओर से 23 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की गई है। वर्तमान में 17 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध है।
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वर्जन
अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन की कमी न हो इस बात को लेकर निर्धारित कोटे की ऑक्सीजन को समय पर प्लांट तक पहुंचाया जाता है। पारदर्शिता के साथ ही इसकी बाटलिंग कर अस्पताल तक गैस पहुंचाई जा रही है।
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- कैप्टन मनोज कुमार, उपायुक्त।
वर्जन
ओडिशा से ऑक्सीजन टैंकर को प्लांट तक लाना और खाली टैंकर वायुसेना के चॉपर तक समय पर पहुंचाना बहुत ही महत्वपूर्ण काम है। इस पूरे मामले में एक-एक मिनट का समय बचाने में पुलिस टीम काम कर रही है।
- राहुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक।
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