महम। हरियाणा बनने के बाद महम विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक प्रो. महासिंह नहरा नहीं रहे। लगभग 93 वर्षीय निंदाना निवासी महासिंह नहरा पिछले दस दिनों से कोरोना संक्रमण के कारण बीमार चल रहे थे। दो मई को उनको पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया गया था। जहां बुधवार अल सुबह उनकी मौत हो गई। कोरोना संक्रमण को देखते हुए उनके परिवार के लोगों के सैंपल लिए गए हैं।
महासिंह नहरा की उच्च आदर्शों और सादगी का जीवन जीने वाले व्यक्तित्व के रूप में पहचान रही है। हरियाणा गठन के बाद 1967 में हुए आम चुनावों में प्रो. महासिंह नहरा को महम चौबीसी पंचायत का प्रत्याशी बनाया गया था। महासिंह के मुुख्य मुकाबले में महम शहर के बदरी प्रसाद काला थे। इस चुनाव में महासिंह बद्रीप्रसाद काला के मुकाबले 5514 मतों से विजयी घोषित हुए थे। तब राव बिरेंद्र सिंह ने कांग्रेस से बगावत करके हरियाणा में विशाल हरियाणी नामक पार्टी का गठन करके सरकार बनाई थी। इस सरकार को महासिंह ने समर्थन दिया तथा राज्य शिक्षामंत्री बने। यह सरकार लगभग सात महीने ही चली थी। उनके पौत्र विशाल नहरा ने बताया कि प्रो. महासिंह ने अपने मंत्रीत्व कार्यकाल में गांव निंदाना के स्कूल को आठवीं से 12वीं कक्षा तक करवाया। स्कूल के मैदान को बढ़वाया। मोखरा, सैमाण, खेड़ी तथा सीसर आदि के लिए सड़कें बनीं।
पंचायती व्यक्ति थे महासिंह
महासिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ने वाले बदरीप्रसाद काला के पुत्र जगत सिंह काला ने कहा कि प्रो. महासिंह नहरा हमेशा पंचायती बात करते थे। वे सच्चे व स्पष्ट बोलने वाले थे। कई पंचायतों में उन्होंने अपने सत्यता से फैसलों को मुकाम तक पहुंचाया था। काला ने कहा कि आपस में चुनाव लड़ने के बावजूद उनके तथा उनके पिता जी के बहुत अच्छे संबंध थे।