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सात साल से धूल फांक रहा 28 लाख का विद्युत शवदाह गृह

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Electrical crematorium of 28 lakhs has been burning dust for seven years - फोटो : RohtakCity
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एक तरफ जहां कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर नगर निगम प्रशासन परेशान है, वहीं दूूसरी तरफ सात साल पूर्व शीला बाईपास स्थित रामबाग श्मशान घाट में 28 लाख की लागत से बनाया गया विद्युत शवदाह गृह धूल फांक रहा है। समिति शवदाह गृह को ठीक कराने के लिए कई बार शासन व प्रशासन को पत्र लिख चुकी है, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। अब कोरोना काल में निगम आयुक्त प्रदीप गोदारा ने मुख्यालय को पत्र लिखकर केंद्र को चालू कराने की मांग की है।
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प्रदेश के एकमात्र चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस में प्रदेश भर से कोरोना संक्रमित मरीज दाखिल हो रहे हैं, जिनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गुरुग्राम से आए दो कोराना संक्रमित मरीजों की तो मौत हो चुकी है। सरकार की हिदायत है कि पीजीआई में दम तोड़ने वाले कोरोना संक्रमितों का दाह संस्कार नगर निगम रोहतक द्वारा किया जाएगा। इसमें कोरोना के चलते जारी नियमों का पालन किया जाए। निगम ने इसके लिए वैश्य संस्था के नजदीक शिव मंदिर श्मशान घाट व दफनाने के लिए जींद रोड स्थित कब्रिस्तान का चयन किया हुआ है। गुरुग्राम के दो कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के शवों का शिव मंदिर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया है। हर बार मंदिर समिति इसका विरोध करती है। समिति के प्रधान रमेश सहगल का तर्क है कि यह भीड़भाड़ वाला एरिया है। नजदीक संस्था व मंदिर हैं। ऐसे में यहां पर कोरोना संक्रमित व्यक्ति का संस्कार उचित नहीं है। जबकि निगम के पास अभी दूसरा विकल्प नहीं है। क्योंकि निगम ने एमडीयू के पीछे झज्जर बाईपास के नजदीक जगह चयनित की थी, जिसका एमडीयू प्रशासन द्वारा विरोध किया गया। इसके चलते डीसी ने तत्काल अपने आदेश वापस ले लिए थे। अब निगम आयुक्त ने सरकार को पत्र लिखकर रामबाग स्थित विद्युत शवदाह केंद्र केंद्र चालू कराने का आग्रह किया है।
बदबू आने की शिकायत पर कराया था बंद
रामबाग श्मशान सेवा समिति के सरपरस्त गुलशन लाल जुनेजा ने बताया कि 2010 में राज्यसभा सांसद बने शादीलाल बतरा के सहयोग से रामबाग सेवा समिति ने लाखों रुपये खर्च करके बिजली व गैस से चलने वाला शहदाह गृह स्थापित कराया था। तीन साल तक शहदाह गृह चला। इसी बीच पड़ोसियों ने तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से शिकायत की कि यहां पर लावारिस शव भी आते हैं। उनके बिजली से चलने वाले शवदाह गृह में शव जलाने के बाद आसपास के एरिया में बदबू फैल जाती है। समिति ने समस्या के समाधान के लिए दिल्ली स्थित पंजाबी बाग के मोक्ष केंद्र का दौरा किया था। वहां पर इस तरह की दिक्कत नहीं आई थी।
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पानी में से गुजारी जाए गैस, टंकी नहीं बन सकी
समिति के मुताबिक रोटरी क्लब की मदद से एक एक्सपर्ट को बुुलाया गया। उसने बताया कि दाह संस्कार केंद्र को एक पानी की टंकी से छोड़ना पड़ेगा। उस पानी के बीचोंबीच गैस को केंद्र के अंदर गुजारा जाएगा, तब शव जलने पर बदबू नहीं आएगी। समिति ने कहा कि इस पर 10 से 15 लाख रुपये का खर्च बताया गया था। तय हुआ कि शासन प्रशासन से इसकी व्यवस्था कराई जाए। सरपरस्त का कहना है कि इसके लिए कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
बाबा कपिल पुरी के हाथों से हुआ था शिलान्यास
16 मार्च 2010 को श्री रामबाग शिव मंदिर श्मशान भूमि की सेवा समिति ने बाबा कपिल पुरी के हाथों बिजली व गैस से चलने वाले शवदाह गृह का शिलान्यास करवाया था। इस मौके पर पूर्व पार्षद एवं संस्था के सरपरस्त गुलशन लाल जुनेजा, प्रधान पूर्ण लाल बतरा, रोटरी क्लब के तत्कालीन प्रधान डॉ. अरुण कुमार नरुला व अनिल जैन लोहिया भी मौजूद थे।
सरकार के दिशा-निर्देश पर वैश्य संस्था के नजदीक स्थित शिव मंदिर श्मशान घाट का चयन कोरोना संक्रमित के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए किया हुआ है। वहां की समिति आपत्ति जता रही है। ऐसे में सरकार को पत्र लिखकर रामबाग स्थित बिजली व गैस से चलने वाले शवदाह गृह को ठीक कराकर जलाने की अनुमति मांगी हैं। साथ ही मेयर मनमोहन गोयल से भी बात की है।
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प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम।
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