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करौंथा से आंदोलनकारी किसानों के लिए टीकरी बॉर्डर पर भेजे देसी घी में बने आठ क्विंटल लड्डू

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Eight quintal laddus made in desi ghee sent to the Tikari border for agitating farmers from Karauntha
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रोहतक। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली सीमा पर चल रहा किसान आंदोलन संघर्ष के साथ भाईचारे की मिठास का भी प्रतीक बन चला है। आंदोलनकारी किसानों के लिए अपने हाथों से देसी घी के लड्डू बनाकर ले जाने वाले करौंथा के ग्रामीणों का प्रयास कुछ यही बया कर रहा है। यह आपसी भाईचारा ही है कि जिले के गांवों से हर रोज टीकरी बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों के लिए सैकड़ों किलोग्राम खाद्य सामग्री की सप्लाई जारी है। इसमें एक ट्रैक्टर रोजाना करौंथा से जा रहा है।
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करौंथा के ग्रामीणों ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए आंदोलनकारियों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इसी कड़ी में देसी घी में आठ क्विंटल लड्डू बनाए गए। ये लड्डू टीकरी बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों में वितरित किए गए। ट्रैक्टरों में सवार ग्रामीण लड्डू लेेकर दिल्ली सीमा पर पहुंचे। यहां चक्का जाम की खुशी साझा करते हुए लड्डू बांटकर आंदोलन व भाईचारे को मजबूत बनाने का संदेश दिया।
करौंथा के सरपंच कमल सिंह व मंजीत धनखड़ ने कहा कि गांव के लोगों ने अपनी इच्छा से आंदोलन में सहयोग करते हुए लड्डू बनाने का फैसला लिया। ग्रामीण जगबीर, सुखबीर सिहं, संजय, वीरेंद्र, सुरेंद्र समेत अन्य लोगों ने लड्डू बनाने व उन्हें टीकरी बॉर्डर ले जाकर किसानों में बंटवाने में अहम योगदान दिया। आंदोलन शुरू होने के बाद से गांव के लोग हर रोज दिल्ली सीमा पर किसानों के लिए मदद भेज रहे हैं। पिछले दो वर्षों से मौसम की मार झेल रहे किसानों को खेती से लाभ के बजाय नुकसान हो रहा है। बारिश तो कभी ओलावृष्टि के चलते खेती घाटे का सौदा बना हुआ है। इसके बावजूद आपसी सहयोग (चंदे) से हर रोज मदद जुटा कर भेजी जा रही है। आंदोलन में कभी सब्जी, कभी फल तो कभी लकड़ी या अन्य जरूरी सामान पहुंचा रह हैं।
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