बदलते मौसम के अलावा पर्यावरण प्रदूषण की दोहरी मार आमजन के स्वास्थ्य को बिगाड़ रही है। इस समय बच्चों को रेस्पिरेटरी सीनसीटियल तो बड़ों को इन्फ्लूएंजा व पैरा इन्फ्लूएंजा परेशान कर रहा है। सबसे अधिक प्रभावित अस्थमा के मरीज हो रहे हैं। इसके अलावा मेडिकल साइंस के लिए स्क्रब टाइफस व डेंगू भी मुसीबत बना है। हाल ही के एक माह में पीजीआईएमएस में उपचार के दौरान स्क्रब टाइफस के पांच मरीजों की मौत हो चुकी है।
दीपावली के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स 188 पार हो गया है। इसके चलते सुबह-शाम बुजुर्गों का श्वास लेना मुश्किल हो गया है। इसमें सबसे अधिक समस्या अस्थमा वाले मरीजों को हो रही है। बच्चों में रेस्पिरेटरी सीनसीटियल वायरस (आरएसवी) परेशान कर रहा है। यह बेहद संक्रामक वायरस है। इससे बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं। वहीं बड़ों को इन्फ्लूएंजा व पैरा इन्फ्लूएंजा परेशान कर रहा है। यह श्वसन तंत्र का एक संक्रामक रोग है। इसकी शुरुआत खांसी, जुकाम और हल्के बुखार के साथ होती है। यह वायरस नाक, आंख और मुंह से प्रवेश करता है। यह पीड़ित व्यक्ति के खांसने और छींकने पर दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आता है तो फैलता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि तीनों वायरस के लक्षण कोरोना जैसे ही हैं। इसमें जांच की आवश्यकता है।
ओपीडी में आ रहे एक हजार के करीब मरीज
पीजीआईएमएस, जिला अस्पताल व अन्य क्लीनिकों में रोजाना एक हजार से अधिक मरीज मेडिसिन की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसके अलावा 400 से 500 बच्चे भी संक्रमण का शिकार हो कर उपचार के पहुंच रहे हैं। मेडिकल एक्सपर्ट बताते हैं कि मौसम परिवर्तन के साथ वातावरण में प्रदूषण का असर है। कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को अधिक ध्यान से रहने की जरूरत है।
बोले एक्सपर्ट
समय पर जांच ही है बचाव : डॉ. ध्रुव
पीजीआईएमएस में पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी के अनुसार रेस्पिरेटरी सीनसीटियल वायरस, इन्फ्लूएंजा व पैरा इन्फ्लूएंजा इस समय मरीजों को परेशान कर रहा है। इस समय अस्थमा व अन्य मरीज अधिक परेशान हो रहे हैं। जिन मरीजों को कोरोना के समय फेफड़े प्रभावित हुए हैं, उन्हें भी समस्या हो रही है। थकान, तनाव, अनिद्रा जैसी समस्या सामान्य है। स्क्रब टाइफस भी समस्या है, आईसीयू में दस मरीज उपचाराधीन हैं। पहले पांच मरीजों की मौत भी हो चुकी है। डेंगू के मरीज भी इस समय आ रहे हैं। बदलते मौसम में लोगों से आग्रह है कि वह सावधानी रखें। इस समय श्वास से संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।
एक्यूआई बिगड़ा तो होगी मुसीबत
जिला अस्पताल में बतौर फिजिशियन एवं पूर्व सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार ने बताया कि पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है। आतिशबाजी के बाद यदि पराली जलाई जाती है तो समस्या और बढ़ जाएगी। इस समय पहले ही बुखार, जुकाम, खांसी, डेंगू, श्वास के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। यदि पर्यावरण प्रदूषण को नहीं रोका गया तो स्वास्थ्य सेवाओं की अधिक लोगों को जरूरत पड़ेगी।