संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। उपायुक्त सचिन गुप्ता की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय में मौजूदा स्थिति की समीक्षा, प्रणालीगत कमियों की पहचान व चरणबद्ध रणनीति तय करने के लिए समीक्षा बैठक हुई। इसमें आगामी मानसून से पूर्व आवश्यक उपाय पूरे करने पर चर्चा की गई।
उपायुक्त ने कहा कि शहर की आबादी लगभग 5.63 लाख है। मानक आवश्यकता 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (एलपीसीडी) है जबकि वर्तमान प्रभावी आपूर्ति लगभग 85 एलपीसीडी है। जेएलएन और बीएसबी नहरों से पेयजल आपूर्ति की जाती है।
शहरी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए चार जलघर एवं 26 बूस्टिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। नगर निगम के अंतर्गत हाल ही में 9 ग्रामीण जलघर भी जोड़े गए हैं। समीक्षा में पुरानी पाइपलाइनों, सीमित भंडारण क्षमता, पंपिंग दक्षता, कच्चे पानी की उपलब्धता के लिए भूमि की कमी से जुड़ी चुनौतियां सामने आईं।
इस दौरान 15 मार्च तक पेयजल आपूर्ति से जुड़ी तात्कालिक समस्याओं के समाधान के लिए अल्पकालिक कार्यों की पूर्णता के निर्देश भी दिए गए। सभी जलघरों से जुड़े क्षेत्रों में गंदे पानी और पानी न आने की शिकायतों की पहचान व समाधान के लिए भी कहा गया।
जहां आवश्यक हो, आपूर्ति बढ़ाने के लिए करें जलघरों पर ट्यूबवेल की स्थापना
सचिन गुप्ता ने कहा कि जल गुणवत्ता की सुरक्षा के लिए अस्वच्छ जल कनेक्शनों का विच्छेदन किया गया है। गर्मियों में जल संकट की आशंका वाले प्रभावित क्षेत्रों का मानचित्रण किया जा चुका है। इस दौरान आपूर्ति बढ़ाने के लिए नहरों से ट्रैक्टर-बुर्मा के माध्यम से कच्चा पानी उठाने की अस्थायी व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए।
सचिन गुप्ता ने कहा कि यह चरण पेयजल प्रणाली की क्षमता और लचीलापन बढ़ाने के लिए स्थायी समाधान प्रदान करने पर केंद्रित है। स्वीकृत परियोजना के अंतर्गत पुरानी एसी, पीवीसी, सीआई पाइपलाइनों को डीआई पाइपलाइनों से प्रतिस्थापित करें जिससे सभी प्रमुख जलघरों के अंतर्गत कई कॉलोनियों में गंदे पानी की शिकायतों का स्थायी समाधान होगा। कच्चे पानी के भंडारण की क्षमता बढ़ाने के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान व हस्तांतरण किया जाएगा। इसमें तिलियार झील और गढ़ी बोहर से संबंधित प्रयास शामिल हैं।