200 मीटर दौड़ में 36 साल से कोई भी पुरुष खिलाड़ी नहीं कर पाया था क्वालीफाई
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देश का मान बढ़ाने के लिए खेल किस कदर एक खिलाड़ी की रगों में बस जाता है, उसकी सबसे बड़ी बानगी अजायब गांव का धावक धर्मबीर है। उसने 36 साल बाद देश को ओलंपिक का टिकट दिलाने के लिए कर्ज लेकर प्रैक्टिस किया। 200 मीटर में पिछले 36 साल से किसी पुरुष धावक को ओलंपिक का टिकट नहीं मिला था। जबकि धर्मबीर ने नेशनल रिकॉर्ड के साथ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। अब धर्मबीर देश के लिए मेडल की उम्मीद के साथ दिन रात लगा हुआ है।
अजायब के धर्मबीर सिंह ने 2015 में फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह का नेशनल रिकार्ड तोड़ा था। उसी समय लगने लगा था कि उनके बाद कोई धावक आया है जो भारत का 36 साल बाद ओलंपिक टिकट का सूखा खत्म कर सकता है। उस दौरान उसकी खूब चर्चा भी हुई। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी उस समय आई जब धर्मबीर की प्रैक्टिस में आर्थिक हालत अड़चन पैदा करने लगी। उसके पिता श्रद्धानंद गांव में खेती करते हैं और उनके पास जमीन भी ज्यादा नहीं है। खेती के सहारे केवल परिवार का गुजारा होता है। इसके बावजूद धर्मबीर के सिर पर ओलंपिक टिकट लेने का एक जुनून सवार था। प्रैक्टिस जारी रखने के लिए उसने अपने दोस्तों और करीबियों से कर्ज भी लिया। हालांकि उसकी आर्थिक हालत का पता चलने पर कुछ अन्य लोग भी आगे आये और उसकी हर तरह से मदद की गई। जिसका नतीजा यह है कि उसने नेशनल रिकॉर्ड बनाकर ओलंपिक का टिकट पक्का किया।
बोल्ट ने 19.32 सेकेंड में गोल्ड जीता, धर्मबीर केवल 1.13 सेकेंड दूर
लंदन ओलंपिक में उसैन बोल्ट ने 200 मीटर को 19.32 सेकेंड में पूरा करके गोल्ड जीता था। जबकि धर्मबीर ने 20.45 सेकेंड में 200 मीटर की बाधा पार करके ओलंपिक का टिकट लिया है जो बोल्ट के रिकॉर्ड से 1.13 सेकेंड पीछे है। धर्मबीर कहते हैं कि ओलंपिक में मेडल जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे, जिससे 36 साल बाद मिला टिकट मेडल में बदल जाए।