रोहतक। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान लोकेंद्र फौगाट के वकालत के लाइसेंस के निलंबन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले के खिलाफ पूर्व प्रधान ने याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर व निपुन अरोड़ा ने याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का कहना है कि अधिवक्ता का लाइसेंस निलंबन करने के लिए ठोस आधार होना चाहिए। समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अधिवक्ताओं के लाइसेंस को बिना उचित कारण निलंबित नहीं किया जाना चाहिए।
बार एसोसिएशन के वर्तमान प्रधान व पूर्व महासचिव दीपक हुड्डा ने पूर्व प्रधान के खिलाफ बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा में शिकायत की थी। बाद में मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया में पहुंच गया था। फरवरी में पूर्व प्रधान के वकालत के लाइसेंस पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद पूर्व प्रधान ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
जिन आरोपों के आधार पर उनका वकालत का लाइसेंस रद्द किया गया, वे आरोप निराधार हैं। उनको न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके वकालत के लाइसेंस के निलंबन पर रोक लगा दी है। वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव कानूनी कदम उठा रहे हैं।
लोकेंद्र फौगाट, पूर्व प्रधान जिला बार एसोसिएशन
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका या किसी निर्णय की कोई सूचना नहीं है। आर्डर की कॉपी आने के बाद ही कुछ कह सक पाऊंगा।
दीपक हुड्डा, शिकायतकर्ता एवं प्रधान जिला बार एसोसिएशन