दीपेंद्र हुड्डा द्वारा जारी किया गया फोटो।
- फोटो : सोशल मीडिया
कांग्रेस के तत्कालीन रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने रोहतक-महम-हांसी रेलवे लाइन की नींव रखी थी। साथ में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी मौजूद थे। 11 साल बाद लाइन पर ट्रेन चलने से संतुष्टि है। शुक्रवार को 8 जुलाई 2013 के शिलान्यास कार्यक्रम का फोटो जारी करते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने यह बात कही।
हुड्डा ने कहा कि रेलवे लाइन के शुक्रवार को हुए उद्घाटन कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित किया था, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि वे अपने विचार नहीं रख सकते। उन्होंने कहा कि इसलिए वे भाजपा नेताओं के लिए ताली बजाने नहीं गए।
उन्होंने बताया कि इस रेल लाइन को उन्होंने न सिर्फ मंजूर कराया, बजट मंजूर कराया बल्कि इसका शिलान्यास कराकर काम भी शुरू कराया। लेकिन, आज उसके उद्घाटन समारोह पर उन्हें ही बोलने से मना कर दिया गया तो ऐसा लगा कि सरकार उन्हें सिर्फ अपमानित करने के लिए बुला रही है।
पूरी लाइन पर विस्तार से हुड्डा ने बताया कि यूपीए सरकार से इस परियोजना को 09 नवम्बर 2011 को योजना आयोग से मंजूर कराया। 15 नवम्बर 2011 को कांग्रेस की हुड्डा सरकार ने भूमि की पूरी लागत वहन करने की स्वीकृति दी। वर्ष 2012-13 के रेल बजट में केन्द्र सरकार से फाइनल मंजूरी के साथ 385 करोड़ रुपये आवंटित कराकर 28 जुलाई 2013 को तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने हांसी में रेल-रोड रैली करके रोहतक-महम-हांसी रेल परियोजना का शिलान्यास किया।
दीपेंद्र ने बताया कि इस संबंध में कांग्रेस की तत्कालीन हुड्डा सरकार ने 07 अक्टूबर व 20 दिसंबर 2013 को भूमि अधिग्रहण की धारा 4 तथा 26 जून 2014 को भूमि अधिग्रहण की धारा 6 के अन्तर्गत कार्रवाई शुरु कर दी थी, लेकिन दिसंबर 2015 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस परियोजना की फाइल गुम होने की बात कही। जिसके बाद डाक के माध्यम से परियोजना की पूरी फाइल तुरन्त मुख्यमंत्री के पास भिजवाई थी। हुड्डा का कहना है कि चार साल तक बिना बात के लंबित पड़ी इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाले जाने के विरोध में उन्होंने हांसी में और महम में धरना भी दिया था।
योजना में देरी की वजह से बढ़ी लागत
दीपेंद्र हुड्डा का कहना है कि केंद्र सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के परियोजना निगरानी प्रभाग ने रोहतक-महम-हांसी रेलवे लाइन परियोजना के काम की ऑनलाइन कंप्यूटराइज्ड निगरानी प्रणाली की समीक्षा की। रिपोर्ट से पता चला कि अनावश्यक देरी के चलते ही परियोजना की लागत में भारी उछाल आया। बेवजह देरी के चलते परियोजना की लागत 211.31 प्रतिशत से बढ़कर 893.45 करोड़ हो गई।