रोहतक । वैश्य एजुकेशन सोसायटी के चुनाव से पहले नए वोट मतदाता सूची में जोड़ने को लेकर प्रधान व महासचिव के बीच उभरा विवाद उलझता जा रहा है। कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए सोसायटी प्रधान द्वारा बुलाई गई गवर्निंग बॉडी की बैठक पर उपायुक्त की रोक के बावजूद बैठक हुई। प्रधान ने इस रोक को प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव होने व संस्था में किसी भाजपाई को सेट करने का आरोप लगाया है। महासचिव ने असंवैधानिक तरीके से की गई बैठक को लेकर कानूनी कार्रवाई करने की ठानी है।
सोसायटी प्रधान विकास गोयल का दावा है कि जिला रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज के आदेशानुसार संस्था की गवर्निंग बॉडी की बैठक बुलाई गई। यह बैठक वैश्य कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सभागार में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के तहत हुई। यहां गवर्निंग बॉडी के दस सदस्य शामिल रहे। इसमें प्रधान के अलावा उपप्रधान संजय सिंघल, सहसचिव कैलाश जैन, कोषाध्यक्ष पवन मित्तल, सदस्य अनिल कुमार बिंदल, आनंद बासिया, मनीष जैन, संजय सिंगला, सन्नी गोयल, विकास गोयल शामिल है। यहां चार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक की वीडियोग्राफी कराई गई। कोविड-19 के नियमों की पालना करते हुए बैठक में बहुमत से मुद्दे पास किए। सोसायटी की आजीवन सदस्यता के लिए 31 मार्च तक आवेदन किया है, उन्हें सदस्यता प्रदान की गई। सोसायटी के 194 पुराने आजीवन सदस्यों ने अपने नाम पहचान व पता पुष्टिकरण के लिए 31 मार्च तक आवेदन किया था। इनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। सभी 194 आजीवन सदस्यों का नाम सोसायटी रिकॉर्ड से मिलान करवाकर मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाए। सदस्यों को कोलेजियम आवंटित करने के लिए उपप्रधान संजय सिंगला के संयोजन में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इसमें सन्नी गोयल, मनीष जैन, विकास गोयल, अनिल बिंदल शामिल हैं। महासचिव चंद्र गर्ग पर गंभीर आरोप लगे हुए हैं। इसकी जांच जारी है। जिला रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज ने 29 मई व पांच जून को चुनाव प्रक्रिया पर स्थगन आदेश जारी किए हैं। इसके बावजूद चुनावी प्रक्रिया जारी रखा गया। इससे संस्था की छवि खराब हुई है। आर्थिक नुकसान भी हुआ है। ऐसी परिस्थिति में उन्हें निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया जाना उचित नहीं है। सोसायटी का त्रिवार्षिक चुनाव निष्पक्ष व तय समय पर कराने के लिए सरकार से निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति की जाए। चुनाव कार्यक्रम जारी करने के लिए कोषाध्यक्ष पवन मित्तल के संयोजन में एक समिति का गठन किया गया है। इसमें अनिल बिंदल व मनीष जैन शामिल है।
वैश्य संस्था की गवर्निंग बॉडी की सोमवार को होने वाली बैठक पर कोरोना संक्रमण के चलते रोक लगाई गई। वहां संस्था के 25 हजार सदस्यों के शामिल होने की जानकारी मिली है। यह बैठक सोसायटी प्रधान विकास गोयल ने बुलाई थी। कॉपरेटिव सोसायटी के जिला रजिस्ट्रार ने संस्था के कई पदाधिकारियों को सूचित किया था कि इस तरह की कोई भी बैठक बुलाने से पहले जिला मजिस्ट्रेट-कम-चेयरमैन डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी से अनुमति लेना जरूरी है। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय को ऐसी कोई अर्जी प्राप्त नहीं हुई। इसके चलते बैठक पर रोक लगाई गई।
-आरएस वर्मा, उपायुक्त।
प्रधान की बुलाई गई गवर्निंग बॉडी की बैठक असंवैधानिक है। इसे न तो संस्था की गवर्निंग बॉडी के 11 सदस्यों की मंजूरी थी न महासचिव की। यही नहीं उपायुक्त ने भी इस बैठक पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद बैठक की गई। सरकारी नियमों का सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। इस बारे में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संस्था चुनाव के लिए आए आवेदनों की छंटनी मंगलवार को पूरी होगी। इसके बाद सही आवेदनों की सूची जारी की जाएगी। कुछ लोग फर्जी वोट मतदाता सूची में जुड़वाना चाहते हैं। इनकी प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी होना जरूरी है। ये लोग संस्था पर कब्जा करना चाहते हैं।
-डॉ. चंद्र गर्ग, महासचिव, वैश्य एजुकेशन सोसायटी।
संस्था की गवर्निंग बॉडी की बैठक पर रोक लगाने का फैसला प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव है। यह क्यों और कैसे समझ से परे है। सोसायटी रजिस्ट्रार के कहने पर यह बैठक बुलाई गई। किसी भाजपाई को संस्था में सेट करने का प्रयास है। यही वजह है कि दोपहर 03: 20 बजे पहली व 04:20 बजे दूसरी चिट्ठी हमें भेजी गई। इस बीच हमारी बैठक हो चुकी थी। यही नहीं चिट्ठी में 25 हजार लोगों के बैठक में आने का हवाला दिया गया है। जबकि वहां केवल गवर्निंग बॉडी के सदस्य बुलाए गए थे। बैठक में कुल 10 सदस्य मौजूद हुए। चुनाव को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। यह दो दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद चुनावी घोषणा की जाएगी। सरकार से चुनाव अधिकारी मांगा गया है। वहां से चुनाव अधिकारी नहीं मिलने पर प्रधान गवर्निंग बॉडी से किसी को यह जिम्मेदारी दे सकता है।
-विकास गोयल, प्रधान, वैश्य एजुकेशन सोसायटी।