लघु सचिवालय में गीता जयंती महोत्सव को लेकर चल रही बैठक में डीसी अतुल कुमार का गुस्सा एसडीएम पर उतर गया। एसडीएम बैठक में काफी देरी से पहुंचे थे, जहां उनको बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिली और डीसी का गुस्सा अलग से झेलना पड़ा। एसडीएम ने खुद भी देरी से पहुंचने की बात स्वीकार करते हुए वहां कुर्सी नहीं होने के कारण बाहर आने की बात कही। जबकि डीसी ने एसडीएम के बारे में लगातार शिकायत और पहले भी बैठक में देरी से आने की बात कही है।
पंडित श्रीराम रंगशाला में 8-9 दिसंबर तक गीता जयंती महोत्सव मनाया जाना है। इसकी तैयारियों को लेकर डीसी अतुल कुमार सभी अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। सभी अधिकारियों के पहुंचने पर बैठक को शुरू कर दिया गया। इसके शुरू होने के लगभग एक घंटे बाद एसडीएम मुनीष नागपाल पहुंचे। सभागार में उस समय एक भी कुर्सी खाली नहीं थी और एसडीएम को कुर्सी नहीं मिल सकी। वह कुछ देर बिना कुर्सी के खड़े रहे तो डीसी अतुल कुमार ने उनसे कहा कि आप बाहर निकल जाइए। आपसे कोई बात करनी होगी तो वह बाद में कर लेंगे। एसडीएम उसके बाद भी वहां खड़े रहे और उनको बैठने के लिए कुर्सी दी गई। इस तरह से एसडीएम के बैठक में देरी से पहुंचने पर डीसी का गुस्सा उन पर उतरा।
गीता जयंती महोत्सव की तैयारियों पर अहम बैठक चल रही थी, क्योंकि यह तीन दिवसीय बड़ा कार्यक्रम होना है। इसमें एसडीएम काफी देरी से पहुंचे तो उनको बाहर जाने के लिए कह दिया गया। उनके खिलाफ पहले भी कई बार शिकायतें आयी हैं, लेकिन वह सुधार करने को तैयार नहीं हैं।
-अतुल कुमार, डीसी।
मैं विभागीय कार्य से बाहर था और एयरपोर्ट से सीधे बैठक में पहुंच गया। मैंने बैठक में देरी से पहुंचने के कारण पहले मैसेज भी कर दिया था। मैं बैठक में पहुंचा तो वहां कुर्सी खाली नहीं थी। जिस पर डीसी साहब ने कहा कि आप चले जाइए, आपसे बाद में बात कर लेंगे।
- डा. मुनीष नागपाल, एसडीएम।