अमर उजाला फॉलोअप
: एक माह पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांगा था किला मोहल्ला निवासी समुंद्र सिंह ने मुआवजा
: अब आवेदन जमा नहीं करवाया रहा मुआवजा वितरण कमेटी के पास
: संयुक्त आयुक्त मंजीत सिंह ने मुख्यालय पत्र लिखकर कराया अवगत
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। डी-पार्क अग्निकांड के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए गठित कमेटी की नींद उड़ी हुई है। मुख्यमंत्री नायब सैनी को पत्र लिखकर एक माह पहले खुद अग्निकांड का पीड़ित बताकर मुआवजा मांगने वाले किला मोहल्ला निवासी समुंद्र सिंह आवेदन नहीं दे रहे हैं। न ही आवेदन देने नगर निगम कार्यालय आ रहे हैं।
9 जून को डी-पार्क पर हुए अग्निकांड को लेकर 16 लोगों ने लिखित में आवेदन करके मुआवजा मांगा था। इसमें आठ बड़ी दुकानों के मालिक, दो जूस कॉर्नर मालिक, तीन रेहड़ी मालिक व तीन वाहन मालिक थे। निगम छह लोगों को मुआवजा दे चुका है। आठ की फाइल मुख्यालय अटकी हुई है। वाहन जलने पर अलग से निर्णय होगा।
10 जुलाई को मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से निगम प्रशासन को पत्र भेजा गया। बताया गया कि किला मोहल्ला निवासी समुंद्र सिंह ने पत्र लिखकर बताया है कि वे डी-पार्क पर रेहड़ी लगाते थे। आग की चपेट में आने से उसकी रेहड़ी भी जलकर नष्ट हो गई थी। उन्हें भी मुआवजा दिया जाए।
डीसी की तरफ से निगम के संयुक्त आयुक्त मंजीत सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी की ओर से 21 जुलाई को पत्र लिखकर समुंद्र सिंह से आवेदन मांगा गया लेकिन अब तक न तो आवेदन दिया गया है और न ही कमेटी से संपर्क किया।
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पिता बोले-पारिवारिक विवाद में व्यस्त बेटा, बात होने पर करवा देंगे अवगत
जब दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो कॉल रिसीव करने वाले ने कहा कि वे समुंद्र सिंह के पिता सुरजीत सिंह बोल रहे हैं। मैं भी बाहर हूं। संपर्क होने पर बता दूंगा। बेटा पारिवारिक विवाद की वजह से व्यस्त है।
वर्जन
अभी तक न तो समुंद्र सिंह ने संपर्क किया है और न ही किसी तरह का आवेदन आया है। मुख्यालय अवगत करवा दिया गया है। आवेदन आएगा तो जांच कर निर्णय लिया जाएगा।
- मंजीत सिंह, मुआवजा वितरण कमेटी के अध्यक्ष एवं संयुक्त आयुक्त नगर निगम
नए डीसी की अनुमति से डीडीपीओ निकालेंगे ग्रांट
नगर निगम के पार्षद कपिल नागपाल ने बताया कि विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्णलाल मिड्ढा की ओर से भेजी गई 31 लाख की ग्रांट को लेकर उन्होंने सीटीएम कार्यालय में संपर्क किया है। पता चला है कि नए डीसी की अनुमति से ग्रांट डीडीपीओ की ओर से निकाली जाएगी। इसके बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में आएगी। इसमें अभी आठ से 10 दिन का समय लग सकता है। अमर उजाला की ओर से सोमवार के अंक में ग्रांट अटकने का मामला उजागर किया गया था। तभी से जिला प्रशासन में हलचल है।