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2400 करोड़ के बजट में नहीं आई 7 करोड़ की सीटी स्कैन मशीन

Mon, 21 Sep 2015 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। यहां पांच साल पहले एक्सपायर हुई सीटी स्कैन मशीन के सहारे मरीजों की जांच की जा रही है। इस पर भी यह मशीन आए दिन खराब रहती है। अधिकारियों की कमीशनखोरी का ही नतीजा है कि 6 साल में 2400 करोड़ रुपये से अधिक का बजट मिलने के बावजूद महज 7 करोड़ रुपये की सीटी स्कैन मशीन नहीं खरीदी जा सकी है।
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 अब इसे पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनशिप) पर लाने की योजना है। बता दें कि यहां रोजाना खराब हो रही सीटी स्कैन मशीन के चलते 30 से 40 मरीजों को परेशानी होती है। हैरानी की बात है कि पीजीआई के अपने बजट के अलावा प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का भी पैसा आया, लेकिन मामला फाइलों में ही अटका रहा।

तीन नई मशीन आ सकती थीं पीजीआई में
पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग के लिए दो सीटी स्कैन मशीन खरीदने की मंजूरी मिली। इसमें एक 64 स्लाइश व दूसरी 16 स्लाइश की थी। इसे बाद 64 से 128 स्लाइश में बदला गया। वहीं एसआईएमएच के लिए भी प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत एक 16 स्लाइश की सीटी स्कैन की मंजूरी मिली। यदि सब ठीक से रहता तो पीजीआई को 2010 में ही तीन नई सीटी स्कैन की मशीन मिल जाती। आपसी बहस और तकरार में प्रोजेक्ट में देरी हुई और बाद में रद हुआ। स्थिति यह हुई कि अब एक मशीन के भरोसे काम चल रहा है वह भी आए दिन खराब रहती है।
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कमेटी पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि इसके लिए एक अधिकारी पर सवाल उठाया गया। जब कमेटी की दो अन्य डॉक्टर का नाम इसमें आया तो मामले को समाप्त कर दिया गया। अब कोई न तो मशीन पर बोलने को तैयार है और न ही बजट का पैसा आया और क्यों नहीं खरीद हुई, इस पर बोलने को तैयार है।
सीटी स्कैन की अनुमानित कीमत
128 स्लाइश  :   पांच से छह करोड़
16 स्लाइश    :   दो से ढाई करोड़

बोले विभागाध्यक्ष
1990 में विभाग को सीटी स्कैन की मशीन मिली थी। यह साल 2010 में एक्सपायर हो गई थी। इसके बाद रिपेयरिंग करवा कर काम चलाया जा रहा है। दो रेडियोलॉजी विभाग और एक एसआईएमएच के लिए मशीन आनी थी, लेकिन बीच में बात रह गई। अब पीपीपी योजना के तहत सीटी स्कैन की मशीन आएगी। गड़बड़ी कहां है और किस लेवल पर है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
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- डॉ. रोहताश यादव, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी विभाग, पीजीआई।
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