केंद्र सरकार भारत में पलने वाली 60 किस्म की धरोहर गायों को विकसित करने की योजना बना रही है। इनमें 36 किस्म की गाय सर्वश्रेष्ठ श्रेणी की बताई जा रही हैं, जिनका हरियाणा सहित देश के अन्य राज्यों में पालन बेहद कम है। नेशनल डेयरी प्लान के तहत इस योजना पर काम चल रहा है।
‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में केंद्रीय पशु पंजीकरण योजना एवं कृषि-किसान कल्याण विभाग के दिल्ली, यूपी और हरियाणा के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. हरिकृष्ण सिंह चौधरी ने यह जानकारी दी। योजनानुसार श्रेष्ठ नस्ल की देसी धरोहर गौवंश को शुद्ध नस्ल सुधार परियोजना में शामिल किया जाए, ताकि गौशाला, घरों व अन्य जगहों पर पलने वाली गाय-बैलों का पूरा रिकार्ड तैयार किया जा सके। इससे श्रेष्ठ नस्ल की गायों की क्रासिंग उसी वर्ग के बैल से करा कर नस्ल का सुधार हो सकेगा।
वंश के रिकार्ड से ऐसे होगी नस्ल में एकरूपता
केंद्र सरकार का ये विभाग जागृति पैदा करके पशु का पूरा रिकार्ड तैयार कराएगा। इसमें भारत के श्रेष्ठ गौवंश के दादा, पिता, माता, बच्चों का चुनाव कर जन दुग्ध अभिलेखन से इनके वंश से प्राप्त होने वाली आमदन लाभ और लेखा-जोखा तैयार करके ये मिलान होगा कि किस गौवंश के क्या परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके बाद इनका रजिस्ट्रेशन होगा ताकि किसान को इनका अच्छा मूल्य मिल सके। ये पूरी कवायद गौवंश की नस्ल में एकरूपता लाने लिए होगी।
धरोहर गायों का अस्तित्व कैसे बचाया जाए
धरोहर नस्लों में शुमार हरियाणा नस्ल की गाय के अलावा साहीवाल, गिर, थारपारकर, गंगात्री जैसी गायों का अस्तित्व कैसे बचाया जाए? इसके लिए पशु दुग्ध अभिलेखन के जरिए अच्छे प्रदर्शन संचालन और प्रबंधन के निर्णय में किसानों की सहायता की जाएगी। पशुओं की आनुवांशिक सुधार और मूल्यांकन के लिए पशु दुग्ध का अभिलेखन होगा।