राजद्रोह के आरोपी विरेंद्र सिंह को पेशी के लिए ले जाती पुलिस।
- फोटो : amar ujala
राजद्रोह के आरोपी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अदालत में जमानत याचिका लगाई है। इस संबंध में कोर्ट ने जवाब देने के लिए पुलिस को नोटिस भेजा है। बीमारी का हवाला देते हुए लगाई गई जमानत याचिका पर सुनवाई 30 मार्च को होगी।
याचिका में विरेंद्र सिंह ने दावा किया कि 10 दिनों की पुलिस हिरासत में पुलिस को उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उनके हाथ पैर कांपते है। इस बीमारी से संबंधित रिकॉर्ड भी अदालत को दिखाया गया है। इसके अलावा विरेंद्र ने जमानत की गुहार लगाते हुए कहा कि जब भी उन्हें मुकदमे की सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा, वे कोर्ट के समक्ष पेश होे जाएंगे। बता दें कि पुलिस ने सोमवार को ही प्रो विरेंद्र सिंह को 8 दिन के रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट प्रोफेसर का चार दिन का और रिमांड मांग रही थी, लेकिन कोर्ट ने मांग खारिज कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में सुनारिया भेज दिया था।
10 दिनों तक पूछताछ करने के बाद पुलिस के हाथ कोई पुख्ता सबूत नहीं लगा है। इतना ही नहीं विरेंद्र सिंह हाथ पैर कांपने वाली बीमारी से भी पीड़ित हैं। इसी आधार पर उनकी जमानत याचिका लगाई गई है। दो दिन बाद याचिका पर सुनवाई होगी।
जेके गक्खड़, आरोपी के वकील।
ये है मामला
आरोप है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर विरेंद्र ने जाट आरक्षण आंदोलन को भड़काया। उनका एक विवादित ऑडियो टेप सामने आया था, जिसमें वे आंदोलन को दूसरी जगह भी शुरू करने की बात कह रहे हैं। इस टेप के आधार पर भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन कुमार ने प्रोफेसर विरेंद्र सिंह और दलाल खाप के प्रवक्ता कैप्टन मानसिंह के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था।