राजद्रोह के आरोपी विरेंद्र सिंह को पेशी के लिए ले जाती पुलिस।
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राजद्रोह के आरोपी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह को एक बार फिर कोर्ट से झटका लगा है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की कोर्ट ने विरेंद्र सिंह की रिमांड अवधि कम करने और पुलिस पूछताछ के समय वकील मुहैया कराने की अर्जी खारिज कर दी। हालांकि उनके केस को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है।
आरोपी के वकील जे. के. गक्खड़ ने जिला कोर्ट में एडिशनल कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका लगाई थी। जिला कोर्ट ने उनके केस को एसीजेएम अश्वनी कुमार की कोर्ट से सीजेएम लोकेश गुप्ता की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है। कोर्ट ने विरेंद्र सिंह का नार्को टेस्ट कराने संबंधी याचिका पर सुनवाई नहीं की। अब इसकी सुनवाई सीजेएम लोकेश गुप्ता की अदालत में होगी।
इससे पहले, मंगलवार को जिला कोर्ट में विरेंद्र सिंह से जुड़े तीन बिंदुओं पर सुनवाई हुई। इनमें सबसे पहले जिला कोर्ट ने एडिशनल कोर्ट द्वारा विरेंद्र को रिमांड पर भेजने के फैसले को बरकरार रखा। आरोपी के वकील ने रिमांड को अनावश्यक बताया था। जिला कोर्ट ने कहा इसे नहीं बदला जा सकता है। यह कोर्ट का इंटर लोकेट्ररी फैसला है। इसके अलावा प्रोफेसर को पुलिस पूछताछ के समय वकील मुहैया कराने की बात से भी इनकार कर दिया। अब विरेंद्र सिंह 27 मार्च तक पुलिस रिमांड पर रहेंगे।
कोर्ट ने वकील मुहैया कराने संबंधी अपील को खारिज कर दिया है। इसकी पुनर्विचार अपील की गई थी।
आरसी दलाल आरोपी के वकील
अब मामले की अगली सुनवाई लोकेश गुप्ता की कोर्ट में होगी। इसके लिए लोकेश गुप्ता की कोर्ट एडिशनल कोर्ट को नोटिस करेगी।
जेके गक्खड़ आरोपी के वकील