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मर्डर मिस्ट्री: नौ साल नौ माह में हत्यारे तो दूर वजह तक नहीं ढूंढ सकी पुलिस, न्याय की आशा, पथराई मां की आंखें

Tue, 22 Nov 2022 07:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

प्रतीक को लगी गोली कहां से आई, किसने चलाई... पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है। सैनीपुरा के प्रतीक की फरवरी 2013 में  सिर में गोली मारकर हत्या की गई थी, मामले में अब तक खुलासा नहीं हुआ है। न्याय की उम्मीद में मां की आंखें पथरा गईं है। 
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बेटे प्रतीक की तस्वीर को गोद में लेकर न्याय की उम्मीद में बैठी मां विनीता सैनी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फरवरी 2013। शाम करीब सवा आठ बजे का समय। बारह साल का प्रतीक घर से दुकान पर सामान लेने गया था। वापस आते समय जब नजदीक के एक मकान के कोने पर पहुंचा तो उसके सिर में गोली आकर लगी। अचानक गोली चलने की आवाज के बाद परिवार के लोग बाहर निकल कर आए तो देखा प्रतीक गली में गिरा हुआ था। उसके सिर से खून बह रहा था।

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तत्काल पीजीआई ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि सिर में राइफल से गोली मारी गई है। कई दिन नहीं, माह व साल तक पुलिस ने जांच की, लेकिन आज तक यह भी पता नहीं लग सका कि बेटे की हत्या किसने की।

हरियाणा के रोहतक शहर के सैनीपुरा के प्रतीक की नौ साल नौ माह पहले हुई हत्या आज तक एक रहस्य बनी है। पुलिस हत्यारे को पकड़ना तो दूर यह भी पता नहीं लगा सकी कि वह कौन है और इसकी वजह क्या रही। जिला पुलिस की एसआईटी के बाद स्टेट क्राइम ब्रांच भी इस गुत्थी को सुलझाने में नाकाम साबित हुई। वापस केस जिला पुलिस के पास पहुंच गया है। न्याय की उम्मीद में बेटियों द्वारा हौसला देने के बाद पिता दिनेश सैनी ने एसपी से मांग की है कि केस की नए सिरे से जांच करवाई जाए।
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दिनेश सैनी ने बताया कि पहले रोहतक पुलिस ने एसआईटी गठित कर केस की जांच की। कई दिन तक आसपास के एरिया में छानबीन की गई, किस-किस के पास राइफल है, लेकिन कोई पकड़ में नहीं आ सका। फिर केस स्टेट क्राइम ब्रांच को दे दिया गया। क्राइम ब्रांच भी कुछ नहीं कर सकी। 2017 में एक पुलिसकर्मी का फोन आया कि आपका केस अनट्रेस मानकर बंद किया जा रहा है।

आप आकर हस्ताक्षर कर दें। दिनेश सैनी ने मना कर दिया। परिजनों ने बताया कि जब प्रतीक की हत्या हुई, उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा थे। वे रोहतक आए तो गुहार लगाकर हत्यारों को पकड़वाने की मांग की, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। भाजपा सरकार आने के बाद भी केस अब तक अनट्रेस है।

प्रतीक की मां विनीता के अब तक आंसू नहीं सूखे हैं। वह कहती हैं कि उनका बेटा प्रतीक उस रात दुकान पर चीज लेने गया था। अब तो उन्होंने घर के अंदर ही किराना की दुकान कर ली है। प्रतीक की दो बहनें हैं, जो उससे बड़ी हैं। वही माता-पिता का सहारा बनी हुई हैं। जब भी माता-पिता न्याय की उम्मीद छोड़ते हैं, वे ही दिलासा देती हैं।

पिता के साथ बड़ी बेटी एसपी से मिलने भी गई, ताकि उसके भाई की हत्या के केस की दोबारा जांच खुल सके। बेटी ने बताया कि पुलिस ने शिकायत तो ले ली, लेकिन अभी यह नहीं बताया कि जांच कब शुरू होगी।
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बहरहाल, न्याय की उम्मीद में प्रतीक का परिवार आज भी है और पुलिस के लिए यह पहेली ही है कि उसे लगी गोली किसने चलाई और क्यों चलाई।

मामला काफी पुराना है और मेरे नोटिस में भी नहीं है। अगर नोटिस में आया तो जरूर तथ्य देखकर फैसला लिया जा सकेगा। - उदय सिंह मीना, एसपी रोहतक

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