नगर निगम में रिहायशी प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। यहां अफसरों की जगह कर्मचारी ही फर्जी दस्तखत कर प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं। टैक्स इंस्पेक्टरों की जगह कर्मचारियों ने फर्जी हस्ताक्षर से सैकड़ों प्रमाण पत्र बनाए हैं। जेडटीओ की ओर से केवल दो टैक्स इंस्पेक्टर को प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने की पावर दी गई है। लेकिन प्रमाण पत्रों पर तीन तरह के हस्ताक्षर होने से मामला पकड़ में आया है और कर्मचारी खुद ही इन अधिकारियों की मोहर लगाने के बाद फर्जी हस्ताक्षर करके प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं। जिन जगहों पर इन प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, अगर वहां से जांच होती है तो प्रमाण पत्र बनवाने वालों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी। बता दें कि निगम में इसी तरह कुछ साल पहले फर्जी एनओसी घोटाला सामने आया था। तहसील में रजिस्ट्री कराने व बिजली निगम से नया कनेक्शन लेने के लिए आवेदक को पहले नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य किया गया था। निगम के अधिकारी तभी आवेदक को एनओसी देंगे, जब उसकी तरफ निगम की कोई राशि बकाया नहीं होगी। योजना कारगर सिद्ध हुई। 30 से 40 लाख रुपये निगम के खाते में जमा भी हुए। लेकिन बाद में पता चला कि तहसील में सैकड़ों रजिस्ट्री नगर निगम की फर्जी एनओसी के साथ की गई हैं। ऐसे में रिहायशी प्रमाण पत्राें को लेकर पकड़ में आया खेल भी बड़ा हो सकता है।
नगर निगम में शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के रिहायशी प्रमाण पत्र बनाने के लिए काउंटर बनाया गया है। यहां कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए कर्मचारियों की तैनाती है। काउंटर पर तैनात कर्मचारियों के अलावा ही नगर निगम के कई कर्मचारी इन प्रमाण पत्रों में बड़ा खेल कर रहे हैं। यहां रोजाना 150 से 200 लोग रिहायशी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंचते हैं। उनमें से अधिकतर में टैक्स इंस्पेक्टर की जगह कर्मचारी अपने ही हस्ताक्षर कर देते हैं। खास बात ये भी है कि जेडटीओ की मुहर भी खुद ही लगा देते हैं।
यूं हुआ खुलासा
घपले का खुलासा उस समय हुआ, जब पता चला कि जेडटीओ (जोनल टैक्स ऑफिसर) आर. एन. शर्मा की ओर से नगर निगम के दो टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश और अमन को रिहायशी प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने की पावर दी हुई है। लेकिन नगर निगम से बनने वाले प्रमाण पत्रों पर दिनेश और अमन के हस्ताक्षर के अलावा भी एक अन्य हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। यह हस्ताक्षर किसके हैं, यह कोई भी बताने को तैयार नहीं है। लेकिन अभी तक की छानबीन में सामने आया है कि नगर निगम के कर्मचारी खुद वह तीसरा हस्ताक्षर कर रहे हैं। अधिकारियों को अभी तक इस खेल के बारे में पता ही नहीं है।
आवेदन तक हो सकता है रद्द
कर्मचारियों के हस्ताक्षर से जारी प्रमाण पत्र को अगर आवेदक किसी जगह जमा करते हैं और वहां से उसकी जांच कराई जाती है तो बड़ी परेशानी हो सकती है। इससे नगर निगम अधिकारियों व कर्मचारियों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आवेदन निरस्त हो सकता है। इसलिए प्रमाण पत्र बनवाने वालों को जल्दबाजी के चक्कर में दलालों और फर्जीवाड़े से बचना चाहिए।
तीन प्रमाण पत्रों पर तीन हस्ताक्षर
- सतपाल के रिहायशी प्रमाण पत्र में टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश के हस्ताक्षर हैं। इनको जेडटीओ की ओर से प्रमाण पत्र बनाने की पावर दी गई है।
- सोहन के रिहायशी प्रमाण पत्र में टैक्स इंस्पेक्टर अमन के हस्ताक्षर है और इनको भी जेडटीओ की ओर से प्रमाण पत्र बनाने की पावर दी गई है।
- मनोज के प्रमाण पत्र में किसके हस्ताक्षर हैं, यह कोई नहीं जानता है। ऐसे हस्ताक्षर को कर्मचारियों के बताए जा रहे हैं।
नगर निगम में एक दिन के अंदर ही लगभग 200 लोग रिहायशी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आते हैं। अगर मैं उनको बनाऊंगा तो दूसरे काम नहीं कर सकूंगा। जबकि टैक्स का काम भी जरूरी है। इसलिए ही टैक्स इंस्पेक्टर अमन व दिनेश को इसके लिए पावर दी गई है कि वे प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करें। उनकी जगह कोई और हस्ताक्षर नहीं करता है और ऐसा है तो उसे दिखवाया जाएगा।
आरएन शर्मा, जेडटीओ नगर निगम
दलाली का बड़ा खेल आएगा पकड़ में
अगर निगम अधिकारी पूरे मामले की सही जांच करें तो दलाली का बड़ा खेल पकड़ में आ सकता है। जल्द प्रमाण पत्र और बिना पूरे कागजात के प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर पैसा लेने का मामला भी सामने आ सकता है। बशर्ते की अधिकारी मामले को गंभीरता से लें और सही जांच करवाई जाए।