दंगाइयों ने जो दर्द दिया है, उसे भूल पाना बहुत मुश्किल है। फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के बाद जो हिंसा भड़की, उसे एक माह हो गया है। लेकिन दंगाइयों ने जो घाव दिए, वे अब भी हरे हैं।
बेदर्दी से खोदी गई भाईचारे की खाई और लूटे गए शहर में इस बार होली के रंग फीके रह सकते हैं। हालांकि कभी भी हार नहीं मानने वाले शहर को उम्मीद है कि होली पर भाईचारे का रंग दिखे। उपद्रव के दौरान कई कॉलोनियों ने मौत को बहुत करीब से देखा। उपद्रव के दौरान प्रभावित रही अधिकतर कालोनियों के लोगों का कहना है कि दिलों में दर्द और दहशत है तो होली कैसे मनाएं? लेकिन जुबां पर दुआ है कि होली पर भाईचारा और अमन लौटे।
उपद्रव के दौरान रोहतक शहर की भीतरी कॉलोनी काफी प्रभावित रहीं। इनमें गांधी नगर, चिन्योट कॉलोनी, डीएलएफ कॉलोनी, सुखपुरा चौक, प्रताप चौक, शिवाजी कॉलोनी, एकता कॉलोनी आदि शामिल हैं। शुक्रवार को चक्का जाम की आशंका के चलते महिलाओं ने रसोई का राशन फुल कर लिया।
शिवम एंकलेव में नहीं मनेगी होली
शिवम एंकलेव वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों ने फैसला लिया है कि वे इस बार होली नहीं मनाएंगे। सोसायटी के संरक्षक के. एस. अरोड़ा ने बताया कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जो नुकसान हुआ है उसी के मद्देनजर होली नहीं मनाए जाने का फैसला लिया है। शुक्रवार को सोसायटी की बैठक में श्याम पाहवा, प्रवीण जुनेजा और प्रवीण जुनेजा मौजूद रहे।
इन कालोनियों में भी फीकी रहेगी होली
दंगे के दौरान उपद्रवियों ने चिन्योट कॉलोनी, गांधी नगर, पटेल नगर और डीएलएफ कॉलोनी में भी घुसने की कोशिश की। लेकिन यहां के लोगों ने डटकर सामना किया और दंगाई भाग गए। चिन्योट कालोनी निवासी पंडित सुरेश वशिष्ठ, पंकज शर्मा, पवन, संतोष, ममता, आरती, सुमन और राज ने बताया कि पहले पांच गेट लगे हुए थे। अब सात और नए गेट लगाए हैं। दिलों में खुशियों की जगह दुख है, इसलिए होली फीकी रहेगी।
अगर दोबारा उपद्रव हुआ तो ठीकरी पहरे की पूरी व्यवस्था की गई है। वहीं, गांधी नगर निवासी संदीप, मालती, संतोष, सीमा, रजनी और पूनम ने बताया कि त्योहार तब मनाएं जाते है, जहां खुशियां हों। उपद्रवियों ने उन्हें कभी न भूलने वाला दुख दिया है। इस बार सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम किया है। अब की बार फोर्स भी पूरी है। प्रशासन पर भरोसा लौट रहा है।