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नगर निगम के फर्नीचर खरीद में विजिलेंस को मिला गड़बड़झाला

Sat, 18 Mar 2017 12:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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नगर ‌‌िननिगम - फोटो : amar ujala
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नगर निगम के फर्नीचर खरीद में मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एमई जगदीश चंद और लेखाकार विकास की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विजिलेंस ने अपनी जांच में इन लोगों को खरीद में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार माना है। अपनी जांच रिपोर्ट में विजिलेंस ने लिखा है कि बाजार भाव से फर्नीचर एक लाख 39 हजार 650 रुपये अधिक में खरीदा गया। खरीद प्रक्रिया में मिली अनियमितता के लिए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, एमई और लेखाकार जिम्मेदार हैं। तीनों मेयर का आचरण सरकार के ध्यान में लाने और निगम के इंजीनियर व लेखाकार के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवाएं नियमावली, 1987 दंड अपील के नियम 8 के तहत विभागीय कार्रवाई करने का सुझाव दिया है।
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विजिलेंस की जांच रिपोर्ट के मुताबिक 19 फरवरी 2014 को नगर निगम हाउस ने सर्वसम्मति से वार्डों में जन सुविधा केंद्र खोलने के लिए फर्नीचर खरीदने का फैसला किया। इसके लिए मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजु हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एमई जगदीश चंद्र व लेखाकार विकास को अधिकृत किया गया। इन्होंने सुविधा केंद्रों के लिए 19 आफिस टेबल, 19 रिवोलविंग कुर्सी, 475 प्लास्टिक कुर्सी, 114 स्टील के स्टैंड और 19 अलमारी खरीदने का फैसला किया। इसके लिए एसएस स्टील फर्नीचर हाउस संजय नगर, सलेक्शन फर्नीचर हाउस पालिका बाजार, नियल वुड कार्नर शिवाजी कालोनी से कुटेशन ली। 31 जुलाई 2014 को एसएस स्टील एवं वुडन फर्नीचर को वर्क आर्डर दिया दिया। 19 वार्डों के लिए 18 लाख 98 रुपये का खर्च आया।

एक आइटम को छोड़ सभी का रेट ज्यादा
विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि एक आइटम को छोड़कर सभी का रेट भाव बाजार से ज्यादा पाया गया है। इससे प्रति आइटम नगर निगम को नुकसान हुआ है।
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आइटम                 बाजार भाव, प्रति आइटम    निगम की खरीद     अंतर     
19 मेज                  25 हजार                     26 हजार          19 हजार
19 रिवोलिंग कुर्सी    7000                          8200               22 हजार 800
475 प्लास्टिक कुर्सी  700                              850               71 हजार 250
114 कुर्सी स्टैंड        3400                            3800                46 हजार

नोट : विजिलेंस ने लोहे की अलमारी का मूल्य बाजार में सही पाया है। इस तरह निगम को फर्नीचर की खरीद में एक लाख 39 हजार 500 का नुकसान हुआ है। मामला विवाद में आने के बाद जिस फर्म से फर्नीचर खरीदा गया, उसकी तरफ से 16 जनवरी-2015 को एक लाख 43 हजार का चेक निगम में जमा करवा दिया। इससे साफ है कि फर्नीचर खरीद में अनियमितता बरती गई है। राशि जमा करवाने से निगम को वित्तीय हानि नहीं हुई।

ब्लैक लिस्ट की जाए फर्म
अपनी रिपोर्ट में विजिलेंस ने सिफारिश की है कि एसएस स्टील फर्नीचर हाउस को ब्लैक लिस्ट किया जाए। अगर निगम भविष्य में भी इस फर्म से खरीद करना चाहता है तो फर्म का ऑडिट किया जाना चाहिए।

विजिलेंस की रिपोर्ट पर मुख्य सचिव सहमत
प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव ने अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी निकाय विभाग को पत्र में बताया है कि मामले की जांच महानिदेशक राज्य चौकसी ब्यूरो से करवाई गई। चौकसी विभाग की जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया गया। विभाग महानिदेशक के सुझाव से सहमत है। ऐसे में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, एमई और लेखाकार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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विजिलेंस की जांच पूरी होने की सूचना नहीं है। मंगलवार को चंडीगढ़ जाएंगे। अधिकारियों से मामले की रिपोर्ट लेेंगे। इसके बाद ही कुछ पता पाएंगे।
- मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री
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