हरियाणा में एचपीएससी भर्ती परीक्षा के बाद अब एमडी-एमएस की काउंसिलिंग सवालों के घेरे में नजर आ रही है। एमबीबीएस के बाद पीजी करने का सपना संजोए अपनी बारी का इंतजार कर रहे अनेक विद्यार्थियों के पास दाखिले का विकल्प ही शेष नहीं रहा है। इसकी वजह कुछ विद्यार्थियों के पास एक से अधिक सीटें होना बताया गया है।
इनमें से कुछ सीटें सरकारी तो कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों की हैं। इन अतिरिक्त सीटों पर मोटी रकम के लेन-देन के साथ प्रवेश की आशंका जताते हुए कुछ विद्यार्थियों ने सवाल उठाए हैं। यही नहीं इस संबंध में सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएमईआर व अन्य को चिट्ठी भेजी गई है। ट्विटर के जरिये भी सीटों पर कब्जे का मुद्दा उठाया गया है। यह केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को जारी निर्देशों की भी अवहेलना है।
दरअसल, डीएमईआर (डायरेक्टरेट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से पीजीआई में पिछले कुछ दिनों से काउंसिलिंग प्रक्रिया चल रही है। इसमें एमबीबीएस, एमडी, एमएस, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक नर्सिंग, पैरामेडिकल कोर्स शामिल हैं। एमबीबीएस के बाद पीजी के लिए एमडी व एमएस करने वाले विद्यार्थियों ने काउंसिलिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि मोपअप काउंसिलिंग (तीसरी काउंसिलिंग) में प्रदेश की 123 सीटें हैं। इनमें से 38 सीटें ब्लॉक कर ली गई हैं। इन सीटों पर विद्यार्थियों ने प्रवेश के साथ दूसरे राज्यों व मेडिकल कॉलेजों में भी सीट होल्ड कर ली हैं। ऑल इंडिया की काउंसिलिंग पूरी होने से पहले प्रदेश में काउंसिलिंग कराए जाने की वजह से ऐसा हो रहा है।
पीजीआई में पीजी कोर्सों की मोपअप काउंसिलिंग हुई है। इसके तहत अब विद्यार्थियों को उनकी पसंद के विषय में प्रवेश दिया गया। इस प्रक्रिया में 38 सीटें ऑल इंडिया कोटे के तहत अतिरिक्त रूप से विद्यार्थियों के पास चली गई हैं। इस कारण प्रदेश के विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह गए हैं।
30 तक दस्तावेज जांच, 1 अप्रैल को सीट नियुक्ति
काउंसिलिंग के तहत फीस जमा कराने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए विद्यार्थियों को 25 से 29 मार्च तक का समय दिया गया है। इसके बाद 30 को दस्तावेजों की जांच होगी व एक अप्रैल को सीट पर नियुक्ति दी जाएगी। काउंसिलिंग प्रक्रिया के तहत विद्यार्थियों की पसंद ऑल इंडिया काउंसिलिंग के बाद भरवानी चाहिए थी। यह केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को जारी निर्देशों की भी अवहेलना है। ऐसे में काउंसिलिंग रोक कर नए सिरे से सूची जारी करने की जरूरत है। इससे वंचितों को लाभ मिलेगा।
ऑल इंडिया मोपअप के बाद हो प्रदेश में काउंसिलिंग
प्रदेश में काउंसिलिंग अंतिम चरण की तरफ तेजी से बढ़ रही है। जबकि अभी तक ऑल इंडिया की काउंसिलिंग प्रक्रिया चल रही है। डीएमईआर को ऑल इंडिया की मोपअप काउंसिलिंग समाप्त होने के बाद प्रदेश में काउंसिलिंग शुरू करनी चाहिए। इससे विद्यार्थी एक से अधिक सीटों पर कब्जा नहीं जमा पाएंगे। ऐसी सीटों पर खरीद फरोख्त के अंदेशे से इनकार नहीं किया जा सकता है।
पोर्टल पर डाली टिकट, नहीं हुआ समाधान
काउंसिलिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले विद्यार्थियों ने ट्विटर पर अपनी आईडी से टिकट के जरिये शिकायत भी दर्ज कराई है। कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि वे एक-दो नहीं चार से छह टिकट डाल चुके हैं। इनमें से एक का भी निवारण नहीं किया गया है। अपनी आईडी के जरिये डाली गई टिकट का निवारण नहीं होता देख, प्रवेश व काउंसिलिंग प्रक्रिया के पारदर्शिता व निष्पक्ष होने पर सवाल उठते हैं।
संस्थान ने डीएमईआर की ओर से जारी समय सारिणी के अनुसार काउंसिलिंग कराई है। इसी के तहत मेरिट वाले उम्मीदवारों को सीट अलॉट की गई है। प्रत्येक विद्यार्थी को मूल दस्तावेज दिखाने पर ही प्रवेश दिया जाएगा। यह केवल एक ही जगह संभव है। ऐसे में अतिरिक्त सीट छोड़नी होगी। ऐसे में सीट ब्लॉक करने का सवाल ही नहीं उठता है। विद्यार्थियों की शिकायत पर फैसला डीएमईआर को करना है। डीएमईआर के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. संजय, सदस्य, राज्य प्रवेश कमेटी, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय।