तेज रफ्तार के शौकीन लापरवाह चालकों की वजह से दो परिवारों के चिराग बुझ गए। शहर में हुए अलग-अलग सड़क हादसों में तीन बहनों के इकलौते भाई सोनीपत के रतनगढ़ माजरा निवासी 22 वर्षीय दीपक और अपने माता पिता के इकलौते बेटे हिसार के धाना कलां निवासी 22 वर्षीय मनदीप की मौत हो गई। मनदीप पेशे से इंजीनियर था। एक हादसा जींद रोड स्थित हर्बल पार्क के पास हुआ तो दूसरा आउटर बाईपास स्थित लाढौत चौक पर हुआ। सदर थाना पुलिस ने दोनों मामलों में अज्ञात चालकों पर लापरवाही से वाहन चलाने सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
दरअसल रतनगढ़ निवासी दीपक पिछले काफी समय से रोहतक में सुनार की दुकान पर काम करता था। वह शनिवार को लाखनमाजरा के रहने वाले अपने दोस्त की शादी में गया था। शादी समारोह के बाद वह स्कूटी से वापस रोहतक की तरफ आ रहा था। जैसे ही दीपक स्कू टी लेकर जींद रोड स्थित हर्बल पार्क के नजदीक पहुंचा तो पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी।
इससे उसका सिर सड़क पर जा लगा। आसपास के लोगों की मदद से उसे अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि सिर में चोट लगने के कारण दीपक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। रविवार सुबह परिजन अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। दीपक के पिता महाबीर गांव में खेतीबाड़ी करते हैं। दीपक अपनी तीनों शादीशुदा बहनों का इकलौता भाई था। उसके अलावा परिवार में कोई भी कमाने वाला नहीं है।
घर जाने से एक दिन पहले ही दुनिया से चला गया मनदीप
पेशे से इंजीनियर मनदीप पिछले काफी समय से रोहतक स्थित एक कंपनी में काम करता था। उसके पिता प्रीतम सिंह रोडवेजकर्मचारी हैं। मृतक के चाचा श्यामसुंदर ने बताया कि मनदीप शुक्रवार शाम को अपने दोस्त ओमप्रकाश के साथ खाना खाने के बाद किसी काम के लिए कार से आउटर बाईपास स्थित लाढौत चौक की तरफ जा रहा था। इसी बीच सामने से आ रही तेज रफ्तार एक कार ने उनकी कार को टक्कर मार दी।
टक्कर लगने से मनदीप की कार पलट गई। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल लाया गया तो डॉक्टरों ने मनदीप को मृत घोषित कर दिया जबकि ओमप्रकाश को दाखिल किया गया है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। श्यामसुंदर ने बताया कि मनदीप को शनिवार को घर आना था, लेकिन वह घर आने से पहले ही दुनिया से विदा हो गया। मनदीप हर शनिवार शाम को अपने गांव धाना कलां चला जाता था। मनदीप अपने माता पिता की इकलौती संतान था। उसके अलावा परिवार में कोई भी नहीं है।
हेलमेट होता तो बच जाती जान
तेज रफ्तार लापरवाह ड्राइविंग ने दो घराें के चिराग बुझा दिए। बेटों की मौत ने जिंदगीभर की खुशियां छीन ली। काश दीपक ने हेलमेट पहना होता। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सिर में चोट लगने के कारण दीपक की मौत हुई। अगर हेलमेट होता तो शायद जान बच जाती। जांच अधिकारी एचसी रामनिवास का कहना है कि अज्ञात के खिलाफ लापरवाही से ड्राइविंग का केस दर्ज किया गया है। दीपक ने हेलमेट नहीं लगा रखा था।