रोहतक पीजीआई से तीन साल पहले नवजात बच्ची का अपहरण करने के मामले में दोषी महिला सोनीपत निवासी महक उर्फ ममता को अदालत ने अंडर गोन कर दिया। महिला पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। केस चलने के दौरान महिला जितने समय जेल में रही एएसजे मनपाल रमावत की अदालत ने गुरुवार को उसे ही सजा मान लिया।
जिला उप न्यायवादी अनुज दहिया ने बताया कि सोनीपत जिले के गन्नौर की एक युवती ने शिकायत दी थी। इसमें कहा गया है कि उसका भाई गोहाना में रहता है। उसकी पत्नी गर्भवती थी। वह अपनी भाभी की जांच कराने के लिए 17 फरवरी 2019 को पीजीआई आई थी। जांच के बाद डॉक्टरों ने उसकी भाभी को वार्ड नंबर 12 में भर्ती कर लिया था।
यहां तीन दिन बाद उसकी भाभी ने बेटी को जन्म दिया। 21 फरवरी को वह और उसकी भाभी बच्ची के साथ लेबर रूम के कमरा नंबर एक में टेस्ट करवाने जा रहे थे। करीब साढ़े 12 बजे वार्ड नंबर 2 में ऊपर चढ़ते समय उसकी भाभी की तबीयत बिगड़ गई। वह अपनी भाभी को संभालने लगा। तभी पास खड़ी एक औरत ने कहा कि बच्ची को उसे सौंप दे। उसने अनजान महिला पर भरोसा करके बच्ची दे दी। तभी 35 वर्षीय महिला उसकी एक दिन की भतीजी का अपहरण करके ले गई।
पीजीआई से एक दिन की बच्ची के अपहरण की घटना की सूचना पर पुलिस प्रशासन हरकत में आया। पीजीआई व आसपास के सीसीटीवी खंगाले गए। सीसीटीवी में महिला बच्ची को लेकर जाती साफ दिखाई दी। पुलिस ने उसका फोटो वायरल किया।
इसके चलते सोनीपत स्थित सिक्का कॉलोनी पुलिस चौकी प्रभारी अनिल कुमार अपने एरिया में सीसीटीवी की जांच करते समय दिल्ली कैंप में महिला को पकड़ लिया। अदालत ने मंगलवार को आरोपी महिला महक उर्फ ममता को बच्ची के अपहरण का दोषी करार दिया। वीरवार को उसे सजा सुनाते हुए काटी गई जेल को ही सजा मान कर अंडर गोन कर दिया।