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गांव बेडवा में जिंदा हैंड ग्रेनेड मिलने का नहीं थम रहा है सिलसिला, दो साल में तीसरी बार चरवाहे के हाथ लगा हैंड ग्रेनेड

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गांव बेडवा में जिंदा हैंड ग्रेनेड मिलने का नहीं थम रहा है सिलसिला, दो साल में तीसरी बार चरवाहे के हाथ लगा हैंड ग्रेनेड
लोहा समझ ले जा रहा था घर, जांच में मिला जिंदा हैंड ग्रेनेड

- पूर्व सूबेदार ने शक होने पर पूछताछ की तो हुई पुष्टि, पुलिस ने हैंड ग्रेनेड को कब्जे में लेकर डिफ्यूज कराया
- समय पर न होती पहचान तो हो सकता था बड़ा हादसा

अमर उजाला ब्यूरो
महम।
जिला मुख्यालय से 52 किमी दूर स्थित बेडवा गांव में शुक्रवार की शाम को तीन साल में तीसरी बार हैंड ग्रेनेड मिलने से हड़कंप है। बकरी चरा रहे युवक को कबाड़ के लिए लोहा ले जाते देख गांव के रिटायर्ड सूबेदार के संदेह पर घटना का खुलासा हुआ। समय पर अगर ग्रेनेड की पहचान न होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना की जानकारी महम थाना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने हैंड ग्रेनेड को अपने कब्जे में लेकर गांव से बाहर सन्नाटे में उसे नष्ट कराया।

पुलिस के अनुसार फरमाना गांव का रहने वाला युवक बेडवा गांव के मनियारी वाले तालाब के पास बकरी चरा रहा। वहां पर उसे एक लोहे का भारी भरकम सामान मिला। जिसे वह कबाड़ में बेचने के लिए अपने साथ घर लेकर जा रहा था। रास्ते में बेडवा गांव में रहने वाले सेवानिवृत्त सूबेदार ओम प्रकाश मिल गये। उन्होंने हैंड ग्रेनेड पहचान लिया और उसको तालाब के किनारे रखवा दिया। घटना की जानकारी गांव के सरपंच जगविंदर को दी गई। सरपंच ने महम थाना पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी रमेश कुमार दल-बल के साथ मौके पर पहुंचा। घटना की जानकारी जिला पुलिस मुख्यालय पर दी गई। वहां से दिनेश कुमार के नेतृत्व में बम निरोधी दस्ता भी मौके पर पहुंचा। आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। लोग गांव के बाहर एकत्रित होने लगे। पुलिस ने उन्हें समझा बुझाकर वापस किया। गांव के बाहर सूनसान स्थान पर एक गड्ढा खोद कर उसे नष्ट किया गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
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पहले कब कब मिले हथगोले
- पहली बार तीन साल पहले बेडवा गांव के तालाब की खुदाई कर मिट्टी को सरकारी स्कूल में भरत के लिए डाला गया था। तब किसी की नजर स्कूल में लाई गई मिट्टी में पड़े हथगोले पर पड़ी।

- दूसरी बार 27 मई 2016 को डाब वाले तालाब में नहा रहे बच्चों के हाथ ग्रेनेड लगा। बम निरोधक दस्ते के सब इंस्पेक्टर सुरजीत के नेतृत्व में उसे गांव के खेतों में निष्क्रिय किया गया। उस दौरान दस्ते ने बताया था कि हथगोले पर 1961 एलके 45 एचएम 36 लिखा हुआ था। यह 9 मीटर तक मार कर सकता है जबकि 250 फुट तक इससे खतरा होता है। इसकी पिन जंग खाई हुई थी। इस तरह के हथगोले देश की सेना व अर्द्धसैनिक इस्तेमाल करते हैं।

- तीसरी बार शुक्रवार की शाम को चरवाहे के हाथ लगा हैंड ग्रेनेड।


हर बार हाथ में उठा लेते हैं ग्रामीण
परिणाम से अनजान ग्रामीण हर बार हथगोले को हाथ में लेकर इधर उधर घूमते रहते हैं। पहली बार जब स्कूल में हथगोला पाया गया तो बच्चे इससे गेंद समझ कर खेलते रहे थे। इस बार भी चरवाहा हथगोले को उठा कर घर ले जा रहा था तथा ग्रामीणों ने हाथ में उठा उठा कर देखा।
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कहां से आ रहे हथगोले
आखिर इतनी संख्या में यहां पर जिंदे हथगोले कहां से आ रहे हैं। यह पुलिस व ग्रामीणों के लिए पहेली बनी हुई है। इतना समय बीत जाने के बाद भी मिल रहे हथगोलों के बारे में पुलिस कोई सुराग नही लगा पाई है।


इसे भी जानें..
: गांव की आबादी 1200 है।
: गांव में 500 मतदाता हैं।
: गांव में 25 से अधिक परिवार के लोग सेना में है।
: कुछ लोग सेना से रिटायर्ड भी हो चुके हैं।
: जानकारों का मानना है कि सेना में ड्यूटी के दौरान कोई इसे साथ लेकर आ सकता है। जिसे गांव में लाने के बाद उसने तालाब में डाल दिया हो।
: सेना को अगर हैंड ग्रेनेड पर अंकित संख्या के हिसाब से डिटेल भेजा जाय तो यह पता लग सकता है कि वह कहां से और कब नष्ट करने के लिए भेजा गया है।

कोट
वह अभी नए हैं, पुराने मामलों की जानकारी उन्हें नहीं है। ये हैंडग्रेनेड कहां से आए इसकी गहनता से जांच की जाएगी।
- रमेश कुमार थाना प्रभारी महम, रोहतक।
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