चालान बचाने के लिए दौड़ाई बस, रोकने के लिए चिल्लाते रहे यात्री -AMBALA

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Rohtak Bureau

अमर उजाला ब्यूरो बेरी/रोहतक।चालान बचाने के लिए चालक ने खुद की और 52 यात्रियों की जान जोखिम में डालकर 110 की स्पीड से बस दौड़ाई। कलानौर चौक के पास आरटीए को खड़ा देख चालक ने बस को भगा लिया। कई बार यात्रियों ने बस को धीमा करने के लिए चिल्लाया, लेकिन चालक ने एक न सुनी। तेज रफ्तार की वजह से हादसे में बस चालक, महिला और एक अन्य ने जान गंवा दी और करीब 53 लोग घायल हो गये। इसका खुलासा हादसे के बाद घायल अवस्था में पीजीआई में उपचारधीन यात्रियों ने किया है। हादसे में घायल होने वाले करीब 30 यात्रियों को पीजीआई में भर्ती कराया गया है। करीब 15 यात्रियों को मामूली चोट लगने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। जबकि अन्य यात्री अभी उपचाराधीन है। प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी 5 मिनट तक थमी रही सांस, बेटी बाहर आई तो मिला सुकून सुरेश कुमार : मैं भिवानी के गांव हसाण का रहने वाला हूं। मेरी बेटी मंजू बीए तृतीय वर्ष की छात्रा है। उसका वीरवार को दिल्ली में एमटीएस क ी परीक्षा थी। सही समय पर पहुंचने के लिए मैं अपनी बेटी के साथ ओबरा गांव के पास से राजस्थान से आ रही निजी बस में सवार हुआ था। यह बस दिल्ली जा रही थी। बस में करीब 60 से 65 यात्री सवार थे। पहले तो चालक सामान्य तरीके से बस चला रहा था। जब कलानौर चौक पर पहुंचे तो चालक ने सड़क पर आरटीए की गाड़ी को खड़ा देख लिया। तभी चालक ने अपने साथी से कहा कि उसके पास गाड़ी का टैक्स नहीं है। इसके बाद चालक ने चालान से बचने के लिए बस को तेजी से बेरी रोड की तरफ मोड़ दिया। तभी उसके पीछे आरटीए ने भी अपनी गाड़ी लगा दी। चालक ने अचानक बस की स्पीड बढ़ाकर 110 पर पहुंचा दी। उसने एक बार भी आरटीए की गाड़ी को आगे नहीं आने दिया। जब वह बेरी के झज्जर-भिवानी रोड स्थित मुख्य चौक पर पहुंचा तो दाई तरफ से सीमेंट से भरा एक ट्राला आ रहा था। चालक ने ट्राले से बचने के लिए बाई तरफ बस को मोड़ने का प्रयास किया, लेकिन स्पीड तेज होने के कारण बस सीधा जा टकराई। अचानक अफरातफरी मच गई। जैसे तैसे करके मैं तो बस से उतर गया, लेकिन बेटी सवारियों के बीच में फंस गई। पांच मिनट तक बेटी बस से बाहर नहीं आई तो सासें थमी रही, लगा कि अब वह दुनिया में नहीं है। जब वह बाहर आई तो दिल को सुकून मिला। जब मैंने बेटी को देखा तो उसके सिर से खून बह रहा था। खिड़का का शीशा तोड़कर निकला बाहररमित कुमार: तड़के तीन बजे होने के कारण मुझे नींद आ गई थी। मैं सबसे पीछे वाली सीट पर बैठा था। अचानक तेज झटका लगा और मेरा चेहरा सामने लगी लोहे की एंगल पर जाकर लगा। अन्य यात्री भी एक दूसरे के ऊपर पड़े थे। सभी में अचानक भगदड़ मच र्गई। सभी जल्दी से जल्दी बस से बाहर निकलने में जुटे थे। अंधेरा होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। मेरे मुंह और सिर से खून बह रहा था। मुझे चक्कर आने लगे थे। जब मैं जल्दी बाहर नहीं निकल पाया तो हिम्मत करके पीछे वाली खिड़की तोड़ी। उसके बाद बस से बाहर आया। कुछ ही देर में छह सात एंबुलेंस आ गई थी। सभी घायलों को पीजीआई और अन्य अस्पताल में लाया गया। यात्री गुहार लगाते रहे चालक स्पीड बढ़ाता रहा बस चालक पर रफ्तार तेज करने की इतनी धुन सवार थी कि उसने एक भी यात्री की नहीं सुनी। जब वह लगातार बस की गति तेज कर रहा था तो यात्रियों ने उसे टोका कि स्पीड कम कर ले। मगर उसने यात्रियों से कहा कि कुछ नहीं होगा बस चुपचाप बैठे रहे। जबकि बस में महिलाओं के साथ बच्चे भी सवार थे। यदि एक बार भी चालक यात्रियों की सुन लेता तो शायद हादसे में तीन लोगों को जान न गंवानी पड़ती। शुक्र रहा कि हादसे के कुछ ही देर बाद एंबुलेंस पहुंच गई और यात्रियों को समय पर उपचार मिल गया। क्योंकि तड़के होने के कारण सड़क पर घायलों की मदद करने वाला कोई नहीं था। भिड़ंत होने से यात्रियों के मुंह और आंखों में घुसा सीमेंट बस में सवार यात्रियों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ी। पहले तो हादसे में लगी चोट ने ही यात्रियों को बेसुध कर दिया था। फिर उनकी आंखों और मुंह में सीमेंट घुस गया। बस ने जिस ट्रोले को टक्कर मारी थी उसमें सीमेंट भरा हुआ था। जैसे ही उसके पिछले हिस्से में बस की टक्कर लगी तो सीमेंट के कट्टे फटने के कारण सीमेंट बस में चला गया। इससे यात्रियों के मुंह और आंखों में चला गया। जब बस से यात्रियों को उतारा गया तो सभी के सिर और चेहरे पर सीमेंट लगा हुआ था। हादसे के कारण परीक्षा नहीं, पीजीआई पहुंचे छात्र हादसे के कारण दो एक छात्र और एक छात्रा की परीक्षा भी छूट गई। छात्रा मंजू और छात्र रमित दोनों ही पीजीआई में उपचाराधीन है। मंजू के सिर में गहरी चोट आई है जबकि रमित के चेहरे और सिर में चोट है। दोनों दिल्ली में एमटीएस की परीक्षा देने जा रहे थे। रमित का कहना है कि वह दिल्ली में पढ़ाई करता है। रमित ने कहा कि वैसे ही अधिकतर परीक्षाएं कोर्ट में जाकर कैंसिल हो जाती है। मगर इस बार चालक की गलती के कारण परीक्षा नहीं दे सका। चालक शुरू से ही बस को तेज चला रहा था। यह है पीजीआई में आने वाले घायलों के नाम हादसे के बाद पीजीआई में अकराम, मोहम्मद हनीफ, गोपीचंद, इमरान, मोहम्मद इश्ताक, कृष्ण, सुरेश कुमार, हितेश, साबिर, प्रवीण, मनोज, संजय, सुनील, रमित, मंजू, सुरेश, नसीब, वसीम, विधी, कालीचरण, मोहम्मद उबेर, संजय कुमार, अमित, उमेद सिंह, रामनिवास, सुरभी, हितेश कुमार, राजन जैन और दो अज्ञात घायल पहुंचे। - यात्री की जुबानी : कलानौर चौक के पास आरटीए को देख 110 की स्पीड से भगाई बस- बस में नहीं थे टैक्स के कागज, चालान बचाने के लिए यात्रियों की जान जोखिम में डाली
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